श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-5, बैरी अंधियारे से कापी जंचवानी थी!

मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज पांचवां दिन है, जैसा मैंने पहले कहा, मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा […]

श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-4 : सन्नाटा शहर में!

मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज चौथा दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। इसके […]

श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-3, ‘हम शंटिंग ट्रेन हो गए’!

मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज तीसरा दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। इसके […]

श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-2

कल से मैंने अपनी रचनाएं, जितनी उपलब्ध यहाँ शेयर करना शुरू किया है जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। इसके लिए मैं केवल इतना कर रहा हूँ कि मैंने अपनी ब्लॉग […]

श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-1

जैसा मैंने कल लिखा था, चाहता हूँ कि अपनी रचनाएं, जितनी उपलब्ध हैं, और याद आ रही हैं, एक बार यहाँ शेयर कर लूं, जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। वैसे […]

कविता का मायाजाल!

एक समय था जब दिल्ली-शाहदरा में रहते हुए मैंने बहुत सी कवितायें, नवगीत आदि लिखे थे। मेरा जन्म 1950 में हुआ था दरियागंज, दिल्ली में लेकिन पढ़ाई शाहदरा में जाने के बाद ही शुरू हुई और 1980 तक, अथवा 30 […]

रेल चली तो बैठी हुई थी, मेरे बराबर तन्हाई!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- पिछला ब्लॉग लिखने का जब खयाल आया था, तब मन में एक छवि थी, बाद में लिखता गया और वह मूल छवि जिससे लिखने का सोचा था भूल ही […]

तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे!

आज ज़नाब नज़ीर बाक़री जी की लिखी हुई एक गज़ल याद आ रही है, जिसे जगजीत सिंह जी ने अपनी मधुर आवाज में गाकर अमर कर दिया।     इस गज़ल को सुनते हुए यही खयाल आता है कि कैसे […]

Social media v/s Society!

Today once again I am talking about Social media. While thinking about social media, the first objection that rises in my mind is, how come it is called ‘Social’! Actually it is the thing that has destroyed all social connections […]

उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है!

आज ज़नाब कृष्ण बिहारी ‘नूर’ जी की एक खूबसूरत सी गज़ल शेयर करने का मन हो रहा है। ‘नूर’ साहब उर्दू अदब के जाने-माने शायर थे, इस गज़ल में कुछ बेहतरीन फीलिंग्स और जीवन का फल्सफा भी है। वैसे इस […]

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