कल मेरी नींदों में छुपकर ,जाग रहा था जाने कौन!

आज मैं फिर से निदा फाजली साहब की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| निदा साहब मेरे प्रिय शायर रहे हैं, जहां उन्होने शायरी में अनेक प्रयोग किए हैं, वहीं कभी-कभी वे फकीर जैसे लगते हैं| कुछ पंक्तियाँ उनकी तो […]

छोटी सी बांसुरी- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

वह अट्टहासों का धनी, अब मुस्कुराता तक नहीं!

आज मैं एक बार फिर से अपने प्रिय कवियों में से एक रहे, स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, ये बात मुझे बार-बार बतानी अच्छी लगती है कि मैंने कई बार उनको अपने आयोजनों में […]

Life lessons!

Life- we all live it, with many hopes, we set several targets and are always trying to achieve them. Some people call it a journey, to many destinations which we might fix for ourselves from to time, but we know […]

चाँद से गिर के मर गया है वो!

आज गुलज़ार साहब की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ, जो उनके संकलन यार जुलाहे से ली गई है| गुलज़ार शायरी, रंगमंच और फिल्मों की दुनिया का जाना-माना नाम है| वे विशेष रूप से शायरी में एक्सपेरीमेंट के लिए जाने […]

दिन जब डूब जाता है- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

पेट की पगडंडियों के जाल से आगे!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     आज क़तील शिफाई जी की एक गज़ल याद आ रही है, क्या निराला अंदाज़ है बात कहने का! शायर महोदय, जिनकी नींद उड़ गई है परेशानियों के […]

कोरोना काल के फरिश्ते!

आज एक बार फिर से कोरोना संकट और लॉक डाउन की परिस्थितियों के बहाने चर्चा कर रहा हूँ|   ऐसे राष्ट्रीय संकट के समय भी राजनीति और फिल्म जगत, व्यावहारिक रूप से हर क्षेत्र के लोगों का अलग-अलग चरित्र उजागर […]

क़ीमत नहीं चुकाई गइ इक ग़रीब से!

आज फिल्म- ‘एक महल हो सपनों का’ से किशोर कुमार साहब का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| 1975 में रिलीज़ हुई इस फिल्म का यह गीत लिखा है- साहिर लुधियानवी जी ने और इसके लिए संगीत दिया था- […]

ऐसा भी तो अंगार नहीं मिलता है – गोपाल दास ‘नीरज’

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के दुलारे गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी अपने जमाने में कवि सम्मेलनों का मुख्य आकर्षण हुआ करते थे| हिन्दी फिल्मों में भी नीरज […]

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