Posts for May 2017

8. कालेज के दिन

  जैसी बात हुई थी, अब बारी है कालेज के दिनों के बारे में बात करने की। बाबूराम स्कूल में 6 साल रहा और अच्छा खासा जुड़ाव रहा स्कूल से, इसलिए स्कूल के बारे में, वहाँ के शिक्षकों के बारे […]

7. बाबूराम स्कूल

अब स्कूल के बारे में बात कर लें। कक्षा 1 से 5 तक गौशाला वाले सनातन धर्म स्कूल के बारे में तो बताने को कुछ नहीं है। बाबूराम स्कूल के बारे में ही बात करूंगा जहाँ मेंने कक्षा 6 से […]

6. परला घर

अपने मोहल्ले में कुछ समय तो और बिताना होगा। आज अपने वकील भाई साहब के बारे में बात कर लेते हैं, जिनके पास हम जाकर बसे थे इस मोहल्ले- भोलानाथनगर, शाहदरा में। वकील साहब मेरे मामा के बेटे होने के […]

मोहल्ला मेरा

अब थोड़ा समय उस मोहल्ले को भी दे दें, जो लगभग 25 वर्ष तक मेरा ठिकाना था। जैसा मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था, दरियागंज छोड़कर हम भोलानाथ नगर, शाहदरा में जाकर बसे और वहाँ पर पहली कक्षा से […]

इब्तदा कुछ इस तरह

  किसी ने फिर न सुना, दर्द के फसाने को मेरे न होने से राहत हुई ज़माने को।  खैर दर्द का फसाना सुनाने का मेरा कोई इरादा नहीं है। ज़िंदगी के साथ, इस राह में मिले कुछ विशेष पात्रों, विशेष […]

चल अकेला

हज़ारों मील लंबे रास्ते तुझको बुलाते, यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते है कौन सा वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख ना झेला। चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला । मुकेश जी के गाये इस गीत ने जीवन में […]

एक पुराना दुख

इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियां । (दुश्यंत कुमार) लेकिन ये ब्लॉग लिखने का उद्देश्य तो खिड़कियों को खोलने का प्रयास करना ही है। एक पुराना अनुभव साझा […]

आसमान धुनिए के छप्पर सा

किसी गुमनाम से एक शहर में पैदा हुए थे हम   नहीं है याद पर कोई अशुभ सा ही महीना था, रजाई की जगह ओढ़ी पुआलों की भभक हमने विरासत में  मिला हमको, हमारा ही पसीना था। यह पंक्तियां हैं […]

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