Posts for August 2017

58. वहाँ पैदल ही जाना है…..

आज ऐसे ही, गीतकार शैलेंद्र जी की याद आ गई। मुझे ये बहुत मुश्किल लगता है कि किसी की जन्मतिथि अथवा पुण्यतिथि का इंतज़ार करूं और तब उसको याद करूं। मैंने कहीं पढ़ा था कि शैलेंद्र जी इप्टा से जुड़े थे […]

57. जब से गए हैं आप, किसी अजनबी के साथ

आज एक बार फिर संगीत, विशेष रूप से गज़ल की दुनिया की बात कर लेते हैं। भारतीय उप महाद्वीप में जब गज़ल की बात चलती है तब अधिकतम स्पेस गुलाम अली जी और जगजीत सिंह जी घेर लेते हैं। हालांकि […]

56. दैर-ओ-हरम में बसने वालो —

यह जानकर, हर किसी को अच्छा लगता है कि कुछ लोग हमको जानते हैं। लेकिन दुनिया में हर इंसान अलग तरह का है, कितने लोग वास्तव में ऐसे होते हैं, जो किसी व्यक्ति को ठीक से जानते हैं। कुछ लोग […]

55. मोहसिन मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगी।

संगीत की एक शाम याद आ रही है, कई वर्ष पहले की बात है, दिल्ली के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में गज़ल गायक- गुलाम अली जी का कार्यक्रम था। मेरे बेटे ने मेरे शौक को देखते हुए मेरे लिए एक टिकट […]

54. जीवों का साहचर्य

आज गोवा में आए एक महीना हो गया। 3 जुलाई को दोपहर बाद यहाँ पहुंचे थे, गुड़गांव से। बहुत से फर्क होंगे जीवन स्थितियों में, जिनके बारे में समय-समय पर, प्रसंगानुसार चर्चा की जा सकती है। एक फर्क जो आज […]

53. पहाड़ों के कदों की खाइयां हैं

आज दुष्यंत कुमार का एक शेर याद आ रहा है- पहाडों के कदों की खाइयां हैं बुलंदी पर बहुत नीचाइयां हैं।  यह शेर दुष्यंत जी की एक गज़ल से है, जो आपातकाल  के दौरान प्रकाशित हुए उनके संकलन ‘साये में […]

52. ज़िंदगी ख्वाब है, था हमें भी पता, पर हमें ज़िंदगी से बहुत प्यार था,

मेरे एक पुराने मित्र एवं सीनियर श्री कुबेर दत्त का एक गीत मैंने पहले भी शेयर किया है, उसकी कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं- करते हैं खुद से ही, अपनी चर्चाएं सहलाते गुप्प-चुप्प बेदम संज्ञाएं,  बची-खुची खुशफहमी, बाज़ारू लहज़े […]

Ad


blogadda

blog-adda

top post

BlogAdda

Proud to be an IndiBlogger

Skip to toolbar