80. एक सपने का अंत

डॉ. कुंवर बेचैन की लिखी  पंक्तियां हैं-

विरहिन की मांग सितारे नहीं संजो  सकते

प्रेम के सूत्र नज़ारे नहीं पिरो सकते,

मेरी कुटिया से ये माना कि महल ऊंचे हैं

मेरे सपनों से मगर ऊंचे नहीं हो सकते।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने भी ऊंचे सपने देखने का महत्व बताया है, लेकिन सच्चाई है कि दुनिया छोटी सोच वालों से भरी पड़ी है,  वे अगर आपको बड़ी सोच वाला कोई काम करते हुए भी देखेंगे तो अचंभा करेंगे, सावधान करेंगे और चेतावनी भी दे सकते हैं।

यह सब अचानक याद आया जब सुना कि ‘आरके स्टूडिओ’ पूरी तरह जलकर खाक हो गया है और उसके साथ ही राजकपूर के सपनों की ताबीर पूरी तरह समाप्त हो गई है, किस तरह राज कपूर ने, जो एक बड़े कलाकार बाप के बेटे थे, अच्छे अभिनेता थे, अपनी होम प्रोडक्शन यूनिट प्रारंभ की और उसमें एक-एक कड़ी जोड़ते गए।

हर फिल्म कामयाब तो नहीं होती, बीच-बीच में कंगाली की नौबत भी आई, खास तौर पर जब एक बहुत बड़ा सपना देखा था राजकपूर ने, जिसका नाम था-‘मेरा नाम जोकर’, इस फिल्म की असफलता भी उतनी ही बड़ी थी, और फिर राजकपूर ने बताया कि वो जनता की नब्ज़ जानते हैं और उंन्होंने ‘बॉबी’ बनाई और कहा कि इसको ‘फेल’ करके दिखाओ, जैसा कि हम जानते हैं इस फिल्म ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता प्राप्त की थी। बड़े सपनों कडी‌ में संगम भी सेल्युलॉइड पर एक बहुत सुंदर कविता थी। इस फिल्म के एक गीत की कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं-

सुनते हैं प्यार की दुनिया में, दो दिल मुश्किल से समाते हैं

क्या गैर यहाँ अपनों तक के, साये भी न आने पाते हैं,

हमने आखिर क्या देख लिया, क्या बात है क्यों हैरान हैं हम,

इक दिल के दो अरमान हैं हम।

ऐ मेरे सनम, ऐ मेरे सनम।

बड़े सपनों के नाम से मुझे भारतीय फिल्म जगत का सबसे बड़ा शो-मैन राजकपूर ही याद आता है, जिसके सपनों की एक महान धरोहर- आरके स्टूडियो अब जलकर नष्ट हो गया है।

एक घटना और याद आ रही है, जो पढ़ी थी। ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ की शूटिंग जिस सेट पर हो रही थी, नदी का स्थल था, वहाँ अचानक बाढ़ आ गई, पूरा सेट तहस-नहस हो रहा था, राजकपूर ने एक क्षण के लिए तो माथा पकड़ लिया, फिर कहा- ‘शूट’ और फिर वह सीन उसी रूप में फिल्म में आया, इसी को कहते हैं – ‘बाधाओं के ऊपर पैर रखकर आगे बढ़ जाना’ (मेक हर्डल्स योर स्टेपिंग स्टोंस).

आरके स्टूडिओ के नष्ट होने पर, बड़े सपनों के उस चितेरे और उसके शहीद हो चुके इस सपने को विनम्र श्रद्धांजलि।

नमस्कार।

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