87. आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की

आज भारत की दो महान विभूतियों की  जयंती है, एक तो जिन्हें हम राष्ट्रपिता के नाम से जानते हैं और दूसरे भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी। इन महापुरुषों की जयंती आज देश मना रहा है। राजनीति के क्षेत्र से ऐसे अनेक और लोग हैं जिनको ‘भारत रत्न’ का दर्जा दिया गया, मैं आज एक ऐसे भारत रत्न का ज़िक्र करना चाहूंगा, जो सृजन के क्षेत्र से थे और शायद मेरी सीमित जानकारी के अनुसार एकमात्र कवि हैं, जिन्हें ‘दादा साहब फाल्के’ सम्मान दिया गया।

इनकी लिखी पंक्तियां सुन-सुनकर हम बड़े हुए हैं और हमारे बाद की पीढ़ियां भी  काफी हद तक उनको सुनती हैं-

जलियांवाला बाग ये देखो यहाँ चली थीं गोलियां,

ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियां,

एक तरफ बंदूकें दन-दन एक तरफ थी टोलियां,

मरने वाले बोल रहे थे इंकलाब की बोलियां।

यहाँ लगाई बहनों ने भी बाज़ी अपनी जान की,

इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की।

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की॥

उनके कुछ अन्य प्रमुख गीत हैं-

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल

साबरमति के संत तूने कर दिया कमाल।

एक और-

हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के,

इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के।

एक और गीत जिसे लता जी ने गाया था और चीन से युद्ध के बाद इस गीत को सुनकर नेहरू जी रो पड़े थे, आज भी यह गीत हमें झकझोर जाता है-

ऐ मेरे वतन के लोगो, जरा आंख में भर लो पानी,

जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी।

थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदूक उठाकर,

दस-दस को एक ने मारा, फिर गिर गए होश गंवाकर,

जब अंत समय आया तो कह गए कि अब चलते हैं,

खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफर करते हैं।

प्रदीप जी की कुछ अन्य अत्यंत लोकप्रिय रचनाएं हैं- पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द न जाने कोय’, ‘देख तेरे संसार की हालत, क्या हो गई भगवान’, ‘तुमको तो करोड़ों साल हुए, बतलाओ गगन गंभीर, इस प्यारी-प्यारी दुनिया में क्यों अलग-अलग तक़दीर’, ‘चल अकेला, चल अकेला, तेरा मेला पीछे छूटा राही, चल अकेला’ ‘मैन एक छोटा सा बच्चा हूँ, तुम हो बड़े बलवान, प्रभु जी मेरी लाज रखो’, ‘तूने खूब रचा भगवान, खिलौना माटी का

मुझे याद है कि जब वाजपेयी जी की सरकार थी, तब कवि प्रदीप जी को दादा साहब फाल्के सम्मान प्रदान किया गया था, कवि प्रदीप इस समारोह में नहीं आ सके थे, तब केंद्रीय मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज उनके घर गई थीं और उनके चरण छूकर उनको यह सम्मान भेंट किया था। कवि प्रदीप वास्तव में इस सम्मान के पात्र थे। इस महान सृजनधर्मी को सादर नमन।

नमस्कार।

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2 comments

  1. Aap ke gzb xvideo co Bhai ne Behan Aanand Aata Hai aap kya aajkal aur parso Aane Wale Samay ke baare mein Kushal dekh kar Dekh Lo Aur Bhi Accha Lage ga main aap se apne baare mein kuch jo bhi jo bhi aapse mai baat ho chuki baat hui ICSE Mere baare mein Samaj gaye ho Main kaisa laga dhanyavad