100. जीवन और उसका प्रमाण पत्र!

आज जबकि मेरे ब्लॉग लेखन का शतक बन रहा है, नवंबर का महीना चल रहा है, जबकि सेवानिवृत्त लोगों को अपना ज़िंदा होने का प्रमाण जुटाना जरूरी होता है। आप ज़िंदा हैं इतना काफी नहीं होता, किसी ने कहा है न-

जो ज़िंदा हो, तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है

और नज़र भी किसको आना, ‘सिस्टम’ को, जिसको बिना मतलब के कुछ भी नज़र नहीं आता।

प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि हर वर्ष यह जीवन प्रमाण, प्रमाणित करके भेजे जाने की परंपरा बंद कर दी गई है, स्वतः प्रमाणन से ही काम चल जाएगा, लेकिन सिस्टम बहुत चालाक है, उन्होंने ‘जीवन प्रमाण पत्र’ का नाम बदलकर ‘सर्वाइवल सर्टिफिकेट’ कर दिया, लेकिन अभी भी वही प्रमाणित कराने की आवश्यकता है।

मोबाइल में कोई सिस्टम है, सीधे प्रमाण पत्र भेजने का, लेकिन वह कौन से मोबाइल में, किस तरह से काम करता है भगवान जाने! और वैसे भी ‘सिस्टम’ की इसमें रुचि नहीं है कि लोग इस तरीके का इस्तेमाल करें। वह तो रिटायर्ड लोगों को जीवन प्रमाण पत्र भेजने के लिए लाइन में लगे ही देखना चाहता है।

अपना जीवन प्रमाणित कराते-कराते हर साल कुछ सेवा निवृत्त साथी वहाँ भी पहुंच जाते हैं, जिसके बाद किसी और प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है!

इसी पर याद आया कि एनटीपीसी ऊंचाहार, जहाँ मेरे सेवाकाल का अंतिम पड़ाव था, सात वर्ष का, वहाँ भयंकर हादसा हुआ, बॉयलर फटने का। शायद 32 लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, अंतिम खबर मिलने तक और काफी बड़ी संख्या में लोग घायल हैं।

एनटीपीसी एक उत्कृष्ट निष्पादन करने वाला संस्थान है, इस दुर्घटना के पीछे अगर कोई  लापरवाही थी तो निश्चित रूप में वह जांच में सामने आएगा और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी, लेकिन इस प्रकार के दुर्भाग्यपूर्ण हादसे निश्चित रूप से एक बार के लिए तो आत्मविश्वास को हिलाकर रख देते हैं।

ऐसे में गैर ज़िम्मेदार पत्रकारिता, आग में घी का काम करती है। आज हर कोई वहाँ टूरिज़्म के लिए जा रहा है, राजनीतिज्ञ तो खैर हैं ही, ज़िम्मेदार चैनलों के पत्रकार अपेक्षाकृत अधिक ज़िम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे टटपूंजिए पत्रकार हैं, कोई न जिनके चैनल को जानता है, न उनको! लेकिन क्योंकि वे इस खबर को ‘कवर’ कर रहे हैं, इसलिए लोग देखते हैं। तो ये महाशय तुरंत ‘इंक्वायरी’ करके तुरंत उसके निष्कर्ष भी प्रस्तुत कर देते हैं। ऐसे में वास्तव में लगता है कि कुछ ‘स्टैंडर्ड’ तो इन पत्रकार बंधुओं के लिए भी तैयार किए जाने चाहिएं।

आज के लिए इतना ही,

 

नमस्कार।

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