Posts for December 2017

132. मुबारक़ हो नया साल!

कुछ दिन से अपनी पुरानी कुछ कविताएं शेयर कर रहा हूँ, ऐसी कविताएं जिन्हें पहले कहीं सुनाया, दिखाया या छपवाया नहीं। ये स्टॉक अभी खत्म नहीं हुआ, आगे भी जारी रहेगा, लेकिन इस बीच ये नया साल भी तो आ […]

131. जवां रहो!

अब जब पुरानी कविताएं शेयर करने का सिलसिला चल निकला है तो लीजिए, मेरी एक और पुरानी कविता प्रस्तुत है- सपनों के झूले में झूलने का नाम है- बचपन, तब तक-जब तक कि इन सपनों की पैमाइश जमीन के टुकड़ों, […]

130. बचपन

मेरी कुछ पुरानी कविताओं को शेयर करने के क्रम में, प्रस्तुत है आज की कविता- बचपन बचपन के बारे में, आपके मन में भी कुछ सपनीले खयालात होंगे, है भी ठीक, अपने आदर्श रूप में- बचपन एक सुनहरा सपना है, […]

129. मन के सुर राग में बंधें!

पुरानी कविताएं, जिनको मैंने उस समय फाइनल नहीं माना यानी ‘पास्ट इंपर्फेक्ट’ कविताओं में से, एक कविता आज प्रस्तुत है- मुझमें तुम गीत बन रहो मुझमें तुम गीत बन रहो, मन के सुर राग में बंधें। वासंती सारे सपने पर […]

128. पेड़!

किसी ज़माने में कविताएं लिखने का बहुत चाव था। उस समय जो कविताएं किसी हद तक ‘परफेक्ट’ लगती थीं उनको मित्रों के बीच, गोष्ठियों में पढ़ देता था। बहुत सी पांडुलिपियां ऐसी होती थीं जिनको लेकर तसल्ली नहीं होती थी। […]

127. बुझी हुई बाती सुलगाएं!

अब हम फिर से एक वर्ष के आखिरी मुहाने पर हैं, जैसे कोई किसी किताब के पन्ने पलटता है, लगभग 300-350 शब्द हो जाने के बाद, वैसे ही 365 दिन के बाद, हमारे जीवन की किताब में एक और पन्ना […]

126. कहती टूटी दीवट, सुन री उखड़ी देहरी!

आज एक खबर कहीं पढ़ी कि उत्तराखंड के किसी गांव में केवल बूढ़े लोग रह गए हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जवान लोग रोज़गार के लिए शहरों को पलायन कर गए हैं। वैसे यह खबर नहीं, प्रक्रिया है, जो न […]

125. जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी!

आज बहादुर शाह ज़फर जी की एक गज़ल शेयर करने का मन हो रहा है। अभिव्यक्ति की दुनिया में हम सब एक-दूसरे से जुड़े हैं। कुछ लोग सामान्य जीवन में ही स्वयं को पर्याप्त रूप से अभिव्यक्त करते रहते हैं। […]

124. जीते जी तरना चाहे तो, पी ले गंगाजल के बदले!

आस्था के बारे में एक प्रसंग याद आ रहा है, जो कहीं सुना था। ये माना जाता है कि यदि आप सच्चे मन से किसी बात को मानते हैं, इस प्रसंग में यदि आप ईश्वर को पूरे मन से मानते […]

123. सुनते थे वो आएंगे, सुनते थे सहर होगी!

एक बार और दिल की बात कर लेते हैं, ऐसे ही कुछ बातें और आ रही हैं दिमाग में, आप इसे दिल पर मत लेना। कितनी तरह के दिल लिए घूमते हैं दुनिया में लोग, एक गीत में किसी ने […]

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