110. कभी रो के मुस्कुराये, कभी मुस्कुरा के रोये!

हिंदी फिल्मों के कुछ ऐसे पुराने गीत हैं, जो आज की तारीख में भले ही बहुत ज्यादा सुनने को नहीं मिलते हों, लेकिन जब अचानक सुनने को मिल जाते हैं, तो सुनकर लगता है कि क्या शायर ने अपना दिल उंडेलकर रख  दिया है और गायक, संगीतकार ने कितने मन से इसको प्रस्तुत किया है।

ऐसा ही एक अनूठा गीत है, 1964 में बनी फिल्म ‘आओ प्यार करें’ का जिसकी संगीतकार हैं उषा खन्ना जी और इसे गाया है स्वर सम्राज्ञी- लता मंगेशकर जी ने। गीतकार हैं श्री राजेंद्र कृष्ण जी। लीजिये गीत को पढ़कर अपनी यादें ताज़ा कर लीजिए, नई उम्र के लोगों के लिए शायद यह गीत भी नया हो-

 

मेरी दास्तां मुझे ही, मेरा दिल सुना के रोये,

कभी रो के मुस्कुराए, कभी मुस्कुरा के रोये।

मिले गम से अपने फुर्सत, तो मैं हाल पूछूं इसका,

शब-ए-गम से कोई कह दे, कहीं और जा के रोये।

मेरी दास्तां मुझे ही….

हमें वास्ता तड़प  से, हमें काम आंसुओं से,

तुझे याद करके रोये, या तुझे भुला के रोये।

मेरी दास्तां मुझे ही….  

वो जो आज़मा रहे थे, मेरी बेक़रारियों को,

मेरे साथ-साथ वो भी, मुझे आज़मा के रोये।

मेरी दास्तां मुझे ही, मेरा दिल सुना के रोये,

कभी रो के मुस्कुराए, कभी मुस्कुरा के रोये।।  

बस कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई गीत स्मृतियों में अटककर रह जाता है, कुछ दिन से ये गीत बार-बार याद आ रहा था, तो सोचा आपके साथ ही मैं भी इस गीत का मनन कर लेता हूँ।

नमस्कार।

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3 comments

  1. Sach mein puraane gaane hi kuchh aur duniya mein le jaate hai..
    Rajendra krishna saheb ka koi jor hi nahi iss prakar ke gaane likhne mein..

    Aap aage bhi @sahir ,aanand bakshi,majroohpuri,hasrat jaipuri,menhdi hasan,hasan kamal,shailendra ka geet
    Share karte rahiega …