विख्यात फिल्म अभिनेता शशि कपूर नहीं रहे। वैसे तो वे लंबे समय से बीमार थे, काफी दिन पहले जब उनको दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया था, तब वह भी उनके अपने स्थान पर दिया गया था और वे उस समय भी व्हील चेयर पर आए थे।

कुछ यह कपूर परिवार में लगभग सभी के साथ रहा है कि वे जब सक्रिय नहीं रहते, तब बहुत मोटे हो जाते हैं, और शायद यह मोटापा भी उनका सबसे बड़ा दुश्मन है।

कपूर परिवार में जिस शानदार परंपरा की शुरुआत पृथ्वीराज कपूर जी ने की, उसको आज भी आगे बढ़ाया जा रहा है और लगभग हर सदस्य ने एक अलग ढंग से अपनी अलग पहचान बनाई है।

अपने पिता पृथ्वीराज जी और दोनो भाइयों राज कपूर और शम्मी कपूर के अभिनय कौशल की कहीं भी नकल न करते हुए, शशि जी ने अपनी एक अलग पहचान पर्दे पर बनाई। उनका पर्दे पर दिखने वाला वह छरहरा बदन, वे शरारती आंखें और शैतानी से भरी मुस्कान भुलाना आसान नहीं है।

मुझे उनकी शुरू की फिल्मों से एक कैरेक्टर याद आता है फिल्म ‘वक़्त’ का, जिसमें परिवार के उजड़ने और बिछड़ने के बाद वे गरीबी का जीवन बिताते हैं, शायद ड्राइवर की नौकरी करते हैं और अमीर हीरोइन से उनको प्यार हो जाता है। फिल्म में ढ़ेर सारे जाने-माने अभिनेताओं के बीच शशि जी अपनी पहचान बनाते हैं। उस फिल्म में इन पर फिल्माया गया गीत था-

दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के, दिल के सहारे आजा प्यार करें

दुश्मन हैं प्यार के जब लाखों जन संसार के, दिल के सहारे कैसे प्यार करें।

शशि जी ने अपने पिता की परंपरा को जारी रखते हुए, थिएटर का साथ नहीं छोड़ा और उनकी जीवन संगिनी भी थिएटर की श्रेष्ठ कलाकार रही हैं।

शशि जी एक अत्यंत लोकप्रिय रोमांटिक कलाकार रहे हैं, फिल्म में उनका होना जैसे फिल्म की सफलता की गारंटी माना जाता था। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी कई अत्यंत सफल फिल्में हैं, जिनमें इन दोनों ने मिलकर गज़ब का समां बांधा है।

शशि जी जहाँ लोकप्रिय फिल्मों के अत्यंत सफल अभिनेता थे, वहीं पृथ्वी थिएटर के लिए उनका निरंतर योगदान और उनकी बनाई अपनी कुछ फिल्में भी अपने आप में बेमिसाल हैं, जिनमें उन्होंने क्रिएटिव रिस्क लिया और वाहवाही अर्जित की।

शशि कपूर जी पर फिल्माए गए कुछ गाने जो याद आ रहे हैं, वे इस प्रकार हैं-

परदेसियों से ना अंखियां मिलाना, एक डाल पर तोता बोले एक डाल पर मैना, मोहब्बत बड़े काम की चीज है, वक़्त करता जो वफा आप हमारे होते, इक रास्ता है ज़िंदगी, यहाँ मैं अजनबी हूँ, कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है, कभी रात दिन हम दूर थे दिन रात का अब साथ है, नैन मिलाकर नैन चुराना किसका है ये काम, चले थे साथ मिलकर चलेंगे साथ मिलकर, सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं, एक था गुल और एक थी बुलबुल, थोड़ा रुक जाएगी तो तेरा क्या जाएगा, लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में हज़ारों रंग के नज़ारे बन गए…….  आदि। ऐसे सैंकड़ों गीत हैं, जो बरबस इस महान कलाकार की याद दिलाते हैं।

इस महान कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि।

नमस्कार

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