आखिर आ ही गया नया साल!

नववर्ष का शिशु, धरती पर अपने नन्हे पांव रख चुका है, इसकी अगवानी कीजिए।

आज ज्ञान बघारने का समय नहीं है, यह सोचें कि क्या है जो पिछले वर्ष चाहकर भी नहीं हासिल कर पाए, और इरादा बनाएं वह उपलब्धि इस वर्ष प्राप्त करने की!

किसी कवि की पंक्तियां याद आ रही हैं-

आने वाले स्वागत 

जाने वाले विदा, 

अगले चौराहे पर- 

इंतज़ार, 

शुक्रिया। 

और कुछ पंक्तियां किशन ‘सरोज’ जी की ऐसे ही याद आ रही हैं-

भावुकता के कैसे केश संवारे जाएं, 

कैसे इन घड़ियों के चित्र उतारे जाएं, 

लगता है मन की आकुलता का अर्थ यही, 

आगत के आगे हम हाथ पसारे जाएं। 

वैसे आकुलता की बात नहीं, उल्लास की बात है, लेकिन आगत के आगे तो हाथ पसारे जाना है।

नए वर्ष में हम स्नेह और स्वाभिमान दोनों को साथ लेकर आगे बढें।

सभी सुखी हों। सभी का कल्याण हो। इन भावनाओं के साथ, पुनः

नववर्ष की मंगल कामनाएं। 

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