एक वर्ष से कुछ कम समय हुआ है, जब अचानक ब्लॉग लिखने की सनक सवार हुई थी।
मैंने शुरुआत की थी, अपने जीवन के प्रारंभ से, कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं, व्यक्तियों आदि का, उनके माध्यम से मेरे जीवन पर पड़े प्रभाव आदि का ज़िक्र करते हुए। शायद 50-60 ब्लॉग, मैंने अपने जीवन के घटनाक्रम को फॉलो करते हुए, कभी-कभी अपने आपसे संघर्ष करते हुए लिखे। फिर उसके बाद तात्कालिक विषयों, गीत-कविताओं, फिल्मों, कलाकारों आदि को केंद्र में रखकर लिखना प्रारंभ किया।
अब जबकि एक महत्वपूर्ण पड़ाव आ रहा है, 150 ब्लॉग पूरे होने जा रहे हैं, उसी समय मैं कुछ दिन, लगभग एक सप्ताह के लिए घर से बाहर जा रहा हूँ, इस बीच कोई नया ब्लॉग नहीं लिख सकूंगा।
मैंने विचार किया कि यह अच्छा अवसर है, जबकि मैं अपने कुछ चुने हुए पुराने ब्लॉग फिर से प्रकाशित करूं। विशेष रूप से यह इसलिए उपयोगी होगा कि जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था, तब मेरा कोई फॉलोवर इस ब्लॉगिंग साइट पर नहीं था। कुछ उद्यमी लोगों ने तो मेरे पुराने ब्लॉग भी खोज-खोजकर पढ़ लिए हैं, मैं उनका अत्यंत आभारी हूँ, परंतु सबके लिए तो यह संभव नहीं होता।
अगले कुछ दिनों में घर से दूर होने के कारण, मैं प्रयास करूंगा कि कुछ चुने हुए पुराने ब्लॉग प्रकाशित करूं, परंतु मैं सक्रिय रूप से पठन-पाठन, प्रतिक्रिया आदि में भाग नहीं ले सकूंगा, यह काम मैं अवकाश से वापस लौटने पर ही कर पाऊंगा।
आशा है आपको मेरे ये पुराने ब्लॉग रुचिकर एवं सार्थक लगेंगे। अंत में जिगर मुरादाबादी जी का यह प्यारा सा शेर-

उनका क्या काम है, ये अहले सियासत जानें,
मेरा पैगाम मुहब्बत है, जहाँ तक पहुंचे।

नमस्कार।