Posts for January 2018

149. अंतराल- दोहराव

एक वर्ष से कुछ कम समय हुआ है, जब अचानक ब्लॉग लिखने की सनक सवार हुई थी। मैंने शुरुआत की थी, अपने जीवन के प्रारंभ से, कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं, व्यक्तियों आदि का, उनके माध्यम से मेरे जीवन पर पड़े प्रभाव […]

148. कच्ची दीवार हूँ, ठोकर न लगाना मुझको

इंसान परिस्थितियों के अनुसार क्या-क्या नहीं बनता और अपने आपको किस-किस रूप में महसूस नहीं करता। कभी-कभी  जीवन में ऐसा भी लगता है कि अब बहुत सहन कर लिया, एक झटका और लगा तो टूटकर बिखर जाएंगे। अरेे कुछ नहीं  […]

147. खुशबू जैसे लोग

अभी कल ही अपने एक पुराने कवि-मित्र का ज़िक्र किया था, मुद्दत हो गई उनसे मिले लेकिन आज भी याद आती है। हाँ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं लोग जो लंबे समय बाद भी यादों में खटकते रहते हैं, […]

146. इस सूने उदास मौसम में, कुछ तो यार करें

आज फिर पुराने दिनों में झांकने का मन हो रहा है, एक मित्र की याद आ रही है। बात है 1980 से 1983 के बीच की, जब मैं आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक के पद पर कार्यरत था और वहाँ बने […]

145. तेरा दर्द ना जाने कोय

जीवन में अब तक, बहुत से शहरों और क्षेत्रों में रहने का अवसर मिला, हर स्थान की अपनी विशेषता और कमियां हैं। लेकिन कुछ बातें हैं जो भारत में,  हर जगह समान रूप से होती हैं। जैसे रात में आप […]

144. बसंती पागल पवन – राज कपूर

आज एक बार फिर मेरे उस्ताद राज कपूर जी की याद आ रही है, फिल्म- ‘जिस देश में गंगा बहती है’ और उसके एक गीत के बहाने। जबलपुर में जब भेड़ाघाट जाते हैं, तब वहाँ नाव वाले घुमाते हुए बताते […]

143. मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

आज एक बार फिर से निदा फाज़ली साहब की एक गज़ल शेयर करने का मन हो रहा है। गज़ल में अपनी बात कहने का सलीका, और जिस बारीकी से फीलिंग्स को कविता में उकेरा जाता है, यह उनकी पहचान रही […]

142. देखिये आपने फिर प्यार से देखा मुझको!

आज राज कपूर जी की  फिल्म – ‘फिर सुबह होगी’ का एक युगल गीत याद आ रहा है, जिसे साहिर लुधियानवी जी ने लिखा है, खैय्याम जी ने इसका संगीत तैयार किया है और इस गीत को मुकेश जी और […]

141. दिल से दिल की बात कही और रो लिए।

आज लता मंगेशकर जी की गाई एक गज़ल याद आ रही है, जिसे राजेंदर कृष्ण जी ने लिखा है और इसके लिए संगीत दिया है, मदन मोहन जी ने। बड़े सुंदर बोल हैं, दिल को छूने वाले जिनको लता जी […]

140. एक छलिया आस के पीछे, दौड़े तो यहाँ तक आए!

चलो एक ख्वाब बुनते हैं, नई एक राह चुनते हैं। अंधेरा है सफर तो क्या, कठिन है रहगुज़र तो क्या, हमारा फैसला तो है, दिलों में हौसला तो है। बहुत से ख्वाब हैं, जिनको हक़ीकत में बदलना है, अभी एक […]

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