Posts for February 2018

29. एक बूंद पानी में एक वचन डूब गया!

जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! बीच के एक-दो ब्लॉग्स में कुछ छोटे लोगों का ज़िक्र हो गया था, मैं उनको दोहराकर उन लोगों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहता। अब विंध्याचल परियोजना […]

25. अखबारों में, सेमीनारों में, जीता है आम आदमी!

जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! जैसा कि मैंने बताया, अब बारी थी मेरे सेवाकाल के अंतिम नियोजक, एनटीपीसी लिमिटेड के साथ जुड़ने की, जहाँ मेरी सेवा भी सबसे लंबी रही। 21 मार्च, […]

24. और चुकने के लिए हैं, ऋण बहुत सारे!

जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! अब बारी थी, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की ही एक इकाई, खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स में कुछ समय प्रवास की, जयपुर के बाद एक बार फिर से राजस्थान में […]

23. चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है!

जीवन यात्रा का एक और पड़ाव और, एक और पुराना ब्लॉग! मुसाबनी प्रवास के दौरान मेरे 2-3 पड़ौसियों की बात कर लेते हैं, एक पांडे जी थे, बनारस के और सिविल विभाग में काम करते थे, उनके साथ मिलकर मैं […]

162. ठेले पर हिमालय

डॉ. धर्मवीर भारती की रचना का शीर्षक याद आ गया, जो उन्होंने इलाहाबाद में ठेले पर अमरूद का ऊंचा पहाड़ बनाकार बेचने वालों को ध्यान में रखकर लिखा था। दरअसल मैं मुहल्लों को याद कर रहा था, पुराने ज़माने के, […]

161. नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है!

आज जगजीत सिंह जी की गाई एक बहुत सुंदर गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसके लेखक हैं- हस्ती जी। वैसे देखा जाए तो यह गज़ल आज की नहीं लगती, दुनिया बड़ी तेजी से बदल रही है, कौन ख़त लिखता है […]

160. हरापन नहीं टूटेगा

आज  स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर करने का मन हो रहा है, रंजक  जी नवगीत आंदोलन के एक महत्वपूर्ण रचनाकार थे। जो रचना शेयर कर रहा हूँ, इसी शीर्षक से उनका एक प्रारंभिक संकलन भी प्रकाशित हुआ […]

22. बैरी अंधियारे से कॉपी जंचवानी थी!

जीवन यात्रा का एक और पड़ाव और, एक और पुराना ब्लॉग! हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का मऊभंडार में कारखाना था, जहाँ मेरा साक्षात्कार एवं चयन हुआ था, बड़े अधिकारी यहाँ बैठते थे। हमारे वरिष्ठ प्रबंधक- राजभाषा श्री गुप्ता जी भी यहाँ […]

159. मुझको बना दिया है गुनाहों का देवता!

आजकल नीरव मोदी का नाम बहुत गूंज रहा है और इस पर राजनेता भी खूब गला फाड़ रहे हैं, वे भी जिनके शासन काल में ये और ऐसे अनेक घोटाले हुए। इसे ही कहते है ‘ऑफेंस इज़ द बेस्ट डिफेंस’। […]

158. चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला

आज गुलाम अली जी का गाया हुआ एक गीत याद आ रहा है, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा है और इसका संगीत अनु मलिक जी ने तैयार किया है। यह गीत वैसे ही सुंदर लिखा गया है और गुलाम […]

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