मैं अक्सर मुकेश जी के गाए गीत दोहराता हूँ, क्योंकि वे मेरे परम प्रिय गायक हैं, मैं दिल से उनके साथ जुड़ा हूँ, लेकिन यह सच्चाई है कि हमारे देश में एक से एक महान गायक हुए हैं और उनमें से अनेक फिल्म जगत से जुड़े रहे हैं।

आज मुझे तलत महमूद जी का गाया एक गीत याद आ रहा है, जो साहिर लुधियानवी जी ने लिखा है और इसे तलत जी ने ‘चांदी की दीवार’ फिल्म के लिए गाया है।

यह गीत वास्तव में रचनाकारों के दर्द को बयान करता है, जो जीवन में दर्द झेलते हैं, उस दर्द को अपने गीतों में पिरोते हैं और पाते हैं कि दुनिया उनके इस लेखन को भी गंभीरता से नहीं ले रही है।

लीजिए प्रस्तुत है यह गीत-

अश्कों में जो पाया है, वो गीतों में दिया है,

इस पर भी सुना है कि ज़माने को गिला है।

जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है,

जो साज़ पे गुज़री है वो किस दिल को पता है।

हम फूल हैं औरों के लिए लाए हैं खुशबू,

अपने लिए ले दे के बस इक दाग मिला है।

अश्कों में जो पाया है, वो गीतों में दिया है॥

 

आज के लिए इतना ही, नमस्कार।

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