159. मुझको बना दिया है गुनाहों का देवता!

Posted by

आजकल नीरव मोदी का नाम बहुत गूंज रहा है और इस पर राजनेता भी खूब गला फाड़ रहे हैं, वे भी जिनके शासन काल में ये और ऐसे अनेक घोटाले हुए। इसे ही कहते है ‘ऑफेंस इज़ द बेस्ट डिफेंस’।
खैर मुझे फिलहाल राजनेताओं के बारे में कुछ नहीं कहना है!

नीरव मोदी से जुड़े घोटाले में अनेक बैंक कर्मियों और उच्च अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं, एक दो बहादुरों के फोटो तो अखबारों में भी देखने को मिल रहे हैं। भले ही इनके पीछे राजनैतिक बॉस भी रहे हों, परंतु यह सत्य है कि यदि ये बैंक कर्मी लालची न होते तो यह घोटाला न हुआ होता!

मैं यही सोच रहा था कि इन बहादुरों के बच्चे जब स्कूल में जाते होंगे तो उनको कैसा महसूस होता होगा?

हमारे देश को उच्च नैतिक मूल्यों वाला माना जाता है, हम पूरी दुनिया को मानवता का, नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। ये लालच वीर देश को कहाँ ले जाएंगे?

मेरा यही मानना है कि, भले इस प्रकार छुपकर किए जाने वाले आर्थिक अपराध हों, या किसी परदे की आड़ में, जैसे करणी सेना, बजरंग दल, शिव सेना आदि के माध्यम से की जाने वाली तोड़-फोड़, मारपीट आदि हों, जिनको सैद्धांतिक जामा पहनाने की कोशिश जाती है, वे मेरे देश को बहुत पीछे ले जा रहे हैं। ऐसे लोगों के विरुद्ध सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जाए तो कैसा रहे, क्योंकि न्याय व्यवस्था तो सचमुच नाकारा है!

खैर, मुकेश जी का गाया एक गीत प्रस्तुत है, फिल्म- गुनाहों का देवता, गीतकार शैलेंद्र और संगीतकार – शंकर जयकिशन।

चाहा था बनूं प्यार की राहों का देवता,
मुझको बना दिया है गुनाहों का देवता।

ये ज़िंदगी तो ख्वाब है, जीना भी है नशा,
दो घूंट मैंने पी लिया तो क्या बुरा किया,
रहने दो जाम सामने, सब कुछ यही तो है,
हर गम ज़दा के आंसुओं, आहों का देवता।

किस्मत तो हमसे चल रही है चाल हर कदम,
एक चाल हम जो चल दिए तो हो गया सितम,
अब तो चलेंगे चाल हम किस्मत के साथ भी,
पैसा बना संसार की राहों का देवता।

होगा कहीं जो रूप तो पूजा ही जाएगा,
चाहे कहीं हो फूल वो मन को लुभाएगा,
होकर रहेगा ज़िंदगी में प्यार एक बार,
बस कर रहेगा दिल में निगाहों का देवता।

नमस्कार।
                                                                                   ===========

4 comments