आज सईद राही जी की लिखी गज़ल याद आ रही है, जिसे जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने गाकर एक नया आयाम प्रदान कर दिया।

इस गज़ल में कुल मिलाकर प्रेम की, इश्क़ की ताक़त, उसके जुनून के बारे में बताया गया है। वास्तव में जब कोई इंसान प्रेम में डूब जाता है, वैसे यहाँ तो दुनियावी इश्क़ की ही बात है, तब उसका व्यवहार, विश्वास और चमत्कार सब दूसरों को या तो चकित कर देते हैं या परेशान भी कर देते हैं।

बड़ी सुंदर अभिव्यक्तियां हैं इस गज़ल में और उसे इस गायक युगल ने बहुत सुंदर तरीके से गाया है, लीजिए पढ़िए और याद कीजिए-

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा 
दीवारों से टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा ।

हर बात गवारा कर लोगे, मन्नत भी उतारा कर लोगे

                                                 ताबीजें भी बंधवाओगे , जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा । 

तनहाई के झूले झूलोगे हर बात पुरानी भूलोगे

आईने से घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा ।

जब सूरज भी खो जायेगा और चाँद कहीं सो जाएगा 

तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा ।

बेचैनी जब बढ जायेगी और याद किसी की आयेगी

तुम मेरी ग़ज़लें गाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा ।

                                                                                                                             -सईद राही

आज के लिए इतना ही, नमस्कार।