भ्रमण, यायावरी और यदि धार्मिक उद्देश्य जोड़ दें तो यह पवित्र होकर तीर्थ यात्रा बन जाता है।
जी हाँ, आज गेराल्ड गॉल्ड की अंग्रेजी कविता याद आ रही है, जो मुझे बचपन से ही बहुत प्रिय रही है।
आज मैं यहाँ उसका यथासंभव हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करने का भी प्रयास कर रहा हूँ-

भ्रमण पिपासा
पूरब में जहाँ सूरज उगता है, उसके पार; और पश्चिम में समुद्र के भी पार
और पूरब और पश्चिम में मेरी भ्रमण पिपासा, नहीं रहने देगी मुझे चैन से,
ये मेरे भीतर पागलपन के झोंके की तरह मचलती है, उकसाती है मुझे- अलविदा कहने को,
क्योंकि मुझे बुलाते रहते हैं- समुद्र, गगन के सितारे और हाँ आकाश भी तो पुकारता है!

मुझे नहीं पता कि वह जो श्वेत मार्ग दिखता है, वह कहाँ है, और कहाँ हैं नीली पहाड़ियां,
परंतु सूर्य को मित्र बना सकता है मनुष्य, और सितारे को अपना मार्गदर्शक,
और जब एक बार पुकार सुनाई दे जाती है, तब यायावरी की कोई सीमा नहीं बांधी जा सकती,
क्योंकि नदियां बुलाती हैं, सड़कें बुलाती हैं, और हाँ पक्षी भी तो बुलाता है!

वहाँ, जहाँ लंबा क्षितिज पसरा है, और वहीं रहता है दिन-रात,
बूढ़े जलयान घर की ओर लौटते हैं, जबकि युवा जलयान और दूर बढ़ जाते हैं,
 लौट सकता हूँ मैं , लेकिन मैं जाऊंगा अवश्य, और यदि लोग आपसे पूछें कि क्यों,
तो आप पूरा दोष डाल दें सितारों पर और सूरज पर,
और उस सुदूर श्वेत मार्ग पर, आसमान पर।

इस हिंदी अनुवाद के साथ ही मूल अंग्रेजी रचना भी प्रस्तुत है:-

Wander-thirst
Beyond the east the sunrise; Beyond the west the sea
And East and West the Wander-Thirst that will not let me be;
It works in me like madness to bid me say goodbye,
For the seas call, and the stars call, and oh! The call of the sky!

I know not where the white road runs, nor what the blue hills are,
But a man can have the sun for friend, and for his guide, a star;
And there’s no end to voyaging when once the voice is heard,
For the rivers call, and the road calls, and oh! The call of a bird!

Yonder the long horizon lies, and there by night and day
The old ships draw to home again, the young ships sail away
And come I may, but go I must, and if men ask you why,
You may put the blame on the stars and the sun,
And the white road and the sky.Wander-thirst
                                                                                               – Gerald Gould

नमस्कार।