174. जैसे बहते हुए पानी पे हो ‘पानी’ लिखना

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डॉ. कुंवर बेचैन जी की गीत पंक्तियां याद आ रही हैं-

दिल पे मुश्किल है बहुत, दिल की कहानी लिखना
जैसे बहते हुए पानी पे हो, पानी लिखना।

बहता हुआ पानी गतिशीलता का, जीवंतता का और सरसता का प्रतीक है। शुरू से ही नदियों के किनारे नगर बसते आए हैं, सभ्यताओं का विकास हुआ है।
आधुनिक समय में, जबकि लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, यह तो संभव नहीं है कि लोग नदियों के किनारे ही बसे रहें। फिर नदियों का प्रदूषण और उनमें पर्याप्त जल न रहने की भी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में जल संरक्षण और नदियों की सफाई, पेय जल की उपलब्धता और वितरण की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
मुझे कुछ वर्ष पहले की घटना याद आ रही है, हम ट्रेन से शायद कन्याकुमारी जा रहे थे। रास्ते में ट्रेन किसी स्थान पर रुकी या शायद रोकी गई और उसके बाद बहुत सारे लोग अपने बर्तन लेकर ट्रेन में से पानी भरने आ गए। ट्रेन में भरा पानी जबकि पीने के योग्य तो नहीं होता, लेकिन शायद वे लोग पीने के लिए ही ले जा रहे थे।
राज्यों के बीच होने वाले सबसे गंभीर झगड़े पानी को लेकर ही होते हैं, केंद्र और राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने पर भी इन झगड़ों का समाधान नहीं हो पाता, क्योंकि हर राज्य सरकार के लिए अपने ही राज्य का हित सर्वोपरि है।
दूसरी तरफ जब पानी ज्यादा बरसता है, तब नेपाल अपने यहाँ उसे संभाल नहीं पाता, बांधों से पानी छोड़ दिया जाता है और बिहार के काफी बड़े इलाके में लगभग हर साल बाढ़ आती है।
इस प्रकार जल संरक्षण और जल प्रबंधन पर बहुत अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। जैसे पहले हर गांव में एक तालाब तो हुआ ही करता था, वैसी कुछ व्यवस्था भी, आधुनिक परिवेश में करनी होगी।
ये तो बड़ी बातें हैं, सामाजिक और सरकार के स्तर पर होने वाली, लेकिन हर व्यक्ति के लिए प्रकृति के इस अमूल्य संसाधन के महत्व को समझना आवश्यक है, जैसे कुछ बातें इस प्रकार हैं-

1.पानी का इस्तेमाल करते समय, जितना नल को खोलना आवश्यक हो और जितनी देर आवश्यकता हो, उतना ही खोलें। पानी का सदुपयोग करें, बर्बादी नहीं।
2. नहाते समय भी ध्यान रखें कि स्वच्छता अधिक पानी बर्बाद करने से नहीं होती।
3. नदियों और तालाबों को गंदा न होने दें।
4. पीने के पानी का प्रयोग केवल पीने के लिए करें। सिंचाई और गाड़ी आदि की सफाई के लिए यह पानी प्रयोग में न लाएं।
5. सोसायटियों आदि के द्वारा ड्रेन-वाटर को संसाधित करके उसको अन्य कार्यों में प्रयोग करने की व्यवस्था की जाए।

वैसे तो बहुत से बिन्दु गिनाए जा सकते हैं, परंतु सच्चाई यह कि लोग जानते हैं, कि कहाँ पानी का सदुपयोग हो रहा और कहाँ बर्बादी। उनको बस इस संबंध में जागरूक होने की आवश्यकता है।
सरकारों को भी समुद्र के जल को शोधित करके सामान्य उपयोग हेतु तैयार करने और जल संरक्षण आदि के लिए आवश्यक पहल करनी होगी। वरना-

वैसे तो हर रंग में तेरा जलवा रंग दिखाए,
जब तू फिरे उम्मीदों पर तेरा रंग समझ ना आए,
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा।

नमस्कार।
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