175. लाख यहाँ झोली फैला ले …

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आज किशोर दा का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ, फिल्म-फंटूश से, इसे लिखा है साहिर लुधियानवी जी ने और संगीतकार हैं- सचिन देव बर्मन जी।

यही दुनिया है जिसमें हमें रहना होता है, और कहाँ जाएंगे, लेकिन एक तो कुछ लोगों के जीवन में परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं, और फिर जब इस दुनिया से मन उचट जाता है, तब कुछ अच्छा नहीं लगता। और ये फीलिंग्स ऐसा हैं कि भगवान की दया से, हमें इन परिस्थितियों का सामना न करना पड़ रहा हो, तब भी इनको महसूस सभी कर पाते हैं।

किशोर दा ने बडे खुबसूरत अंदाज में गाया है यह गीत-

दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना
जहाँ नहीं चैना वहाँ नहीं रहना
दुखी मन…

दर्द हमारा कोई न जाने
अपनी गरज के सब हैं दीवाने
किसके आगे रोना रोएं
देस पराया लोग बेगाने
दुखी मन…

लाख यहाँ झोली फैला ले
कुछ नहीं देंगे ये जग वाले
पत्थर के दिल मोम न होंगे
चाहे जितना नीर बहाले
दुखी मन…

अपने लिये कब हैं ये मेले
हम हैं हर इक मेले में अकेले
क्या पाएगा उसमें रहकर
जो दुनिया जीवन से खेले
दुखी मन…

इसके साथ ही आज का यह ब्लॉग संपन्न होता है, नमस्कार।

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