Posts for March 2018

172. आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे!

सूरज सनीम जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे ज़नाब तलत अजीज़ ने फिल्म- डैडी के लिए गाया है और यह गीत अनुपम खेर जी पर बड़ी सुंदरता से और खूबसूरत संदर्भ में फिल्माया गया है। कुल […]

41. मधु का सागर लहराता था…!

यादों के समुंदर से एक और मोती, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! मैंने कितनी नौकरियों और अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के बहाने से अपनी राम-कहानी कही है, याद नहीं। लेकिन आज दो नौकरियों की याद आ रही है, […]

Wander Thirst by Gerald Gould- Poem translation!

भ्रमण, यायावरी और यदि धार्मिक उद्देश्य जोड़ दें तो यह पवित्र होकर तीर्थ यात्रा बन जाता है। जी हाँ, आज गेराल्ड गॉल्ड की अंग्रेजी कविता याद आ रही है, जो मुझे बचपन से ही बहुत प्रिय रही है। आज मैं […]

171. भ्रमण पिपासा

भ्रमण, यायावरी और यदि धार्मिक उद्देश्य जोड़ दें तो यह पवित्र होकर तीर्थ यात्रा बन जाता है। जी हाँ, आज गेराल्ड गॉल्ड की अंग्रेजी कविता याद आ रही है, जो मुझे बचपन से ही बहुत प्रिय रही है। आज मैं […]

171. Translation of Poem by Gerald Gould

भ्रमण, यायावरी और यदि धार्मिक उद्देश्य जोड़ दें तो यह पवित्र होकर तीर्थ यात्रा बन जाता है। जी हाँ, आज गेराल्ड गॉल्ड की अंग्रेजी कविता याद आ रही है, जो मुझे बचपन से ही बहुत प्रिय रही है। आज मैं […]

40. मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा!

यादों के समुंदर में एक और डुबकी , लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! पता नहीं क्या सोचकर यह ब्लॉग लिखने की शुरुआत की थी। और इसको शेयर करता हूँ ट्विटर पर, फेसबुक पर! जैसे गब्बर सिंह ने सवाल […]

170. जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा!

आज सईद राही जी की लिखी गज़ल याद आ रही है, जिसे जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने गाकर एक नया आयाम प्रदान कर दिया। इस गज़ल में कुल मिलाकर प्रेम की, इश्क़ की ताक़त, उसके जुनून के बारे में […]

39. पर दिलों पर हुक़ूमत हमारी रही!

चलिए आज फिर से यादों की पुरानी संदूकची खोलते हैं, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! लगभग ढाई वर्ष के लखनऊ प्रवास और सात वर्ष के ऊंचाहार प्रवास की कुछ छिटपुट घटनाएं याद करने का प्रयास करता हूँ। एक […]

38. यह पूजन अपनी संस्कृति का, ये अर्चन अपनी भाषा का।

पुरानी स्मृतियां खंगालने के क्रम में, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! अभी तक मैं वर्षों के हिसाब से बात कर रहा था, जो घटना पहली हुई वह पहले और जो बाद में हुई वह बाद में। पिछले ब्लॉग […]

169. वहीँ खाक़ अपनी उड़ाने चला हूँ।!

चंद तस्वीर-ए-बुतां , चंद हसीनों के खुतूत ! बाद मरने के मेरे घर से ये सामान निकला !! आज चचा ग़ालिब का ये शेर याद आया, तो ये खयाल आया कि कैसे-कैसे लोग होते थे, बल्कि आज भी होते हैं, […]

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