198. जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण और इससे बचाव!

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यह आलेख लिखा था एक उत्पाद का प्रचार करने की दृष्टि से, लेकिन मालूम हुआ कि उत्पादक को इसकी आवश्यकता नहीं है। अब लिखा गया है तो शेयर कर ही लेता हूँ, संभव है किसी के काम आ जाए, हाँ उस उत्पाद के प्रचार वाला भाग इससे निकाल दिया है!

मनुष्य जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं मानी जाती हैं- रोटी, कपड़ा और मकान। मान लीजिए ये सभी हैं और किसी की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी है, संपन्नता है, भोग-विलास की सामग्री है, लेकिन स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तब क्या वह इन सबका आनंद ले पाएगा?

मान लीजिए कि आप ठीक हैं, परंतु आपके बुज़ुर्ग माता-पिता अथवा बच्चे को कोई रोग लग गया है, तब भी आपके आनंद को ग्रहण लग जाता है।

धीरे-धीरे मनुष्य ने बहुत सी बीमारियों पर विजय पाई है, कुछ का प्रभाव कम भी हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत से रोग पनपते हैं और स्वास्थ्य के संबंध में सावधान रहना बहुत ज़रूरी है।

ऐसा ही एक रोग है- जापानी इंसेफेलाइटिस, यह एक संक्रमण है जो एशिया और पश्चिमी पेसिफिक क्षेत्रों में अधिक होता है. इससे दिमाग में सूजन होती है। वैसे यह मच्छर के काटने के कारण, जानवरों से जानवरों में फैलता है, और विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में यह जानवरों के आसपास रहने वाले मनुष्यों को भी हो जाता है। इस रोग को पूरी तरह विकसित होने में 5 से 15 दिन लगते हैं, और इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और उल्टियां आना शामिल होता है।

बच्चे और बूढ़े,  क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, अतः वे इसके जल्दी शिकार हो सकते हैं। यह रोग बच्चों और बूढों के मामले में घातक भी सिद्ध हो सकता है अतः सावधान रहना और समय पर उचित कदम उठाना आवश्यक है।

यह रोग होने पर तो डॉक्टर से परामर्श आवश्यक हो जाता है, लेकिन क्या ही अच्छा हो कि हम उसकी नौबत ही न आने दें! इसके लिए समुचित सावधानी ज़रूरी है।

जब आप ऐसे स्थानों पर अक्सर जाते हैं, जहाँ इस रोग का प्रभाव अधिक है, तब आपको जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव संबंधी टीके लगवा लेने चाहिएं।

इस रोग को फैलाने वाले मच्छरों से बचाव के लिए आप-
– पूरी बांह वाली हल्के रंग की कमीज, लंबी पेंट पहनें।

  • मच्छरों को दूर भगाने वाले किसी प्रभावशाली साधन का प्रयोग करें।

  • आसपास पानी न रुका रहने दें, क्योंकि उसमें मच्छर पनपते हैं।

मच्छरों से बचाव के लिए आप जहाँ अपने कमरे में मच्छरों को भगाने वाले किसी साधन का प्रयोग करें, कोई  सुरक्षात्मक क्रीम भी, शरीर के खुले भागों पर मल सकते हैं, जिससे रक्षा कवच और भी मजबूत हो जाता है।

इस प्रकार समुचित सावधानियों और रक्षा संबंधी प्रोडक्ट्स का प्रयोग करते हुए आप जापानी इंसेफेलाइटिस से अपनी और अपने परिजनों की रक्षा कर सकते हैं।