आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट –

एक समस्या जिससे हमारा देश बहुत लंबे समय से जूझ रहा है और आज वह विश्वव्यापी समस्या बन गई है, वह है आतंकवाद की समस्या।

आज पूरी दुनिया के देश तरक्की करने के रास्ते खोज रहे हैं, एक स्वस्थ प्रतियोगिता हो रही है दुनिया के देशों के बीच में, वहाँ की शासन व्यवस्था चाहे किसी भी प्रकार की हो। संयुक्त राष्ट्र संघ और अनेक अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर राष्ट्राध्यक्ष मिलकर इस बारे में विचार करते हैं कि किस प्रकार आपसी सहयोग के साथ प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुआ जाए। लेकिन यह शैतान, सभी योजनाओं में पलीता लगा देता है।

कुछ देशों के बीच सीमा-विवाद रहता है, हमारे देश को भी दुर्भाग्य से ऐसे पड़ौसी मिले हैं कि हमेशा कोई न कोई विवाद बना रहता है और जो राशि हमें देश की प्रगति पर खर्च करनी चाहिए, उसका एक बड़ा हिस्सा रक्षा तैयारियों पर करना हमारी मजबूरी बन गई है।

इतना ही नहीं, लंबे समय से हम आतंकवाद के, एक ऐसे शत्रु से लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसका पता नहीं होता कि वह कहाँ छिपा बैठा है और कब, कहाँ हमला करेगा। यह शत्रु नैतिकता के किसी प्रकार के नियमों का भी पालन नहीं करता, निहत्थे नागरिकों की हत्या करने में, ट्रेन में या बाजार में ब्लास्ट करने में भी इसको कोई संकोच नहीं होता।

इस प्रकार की परिस्थितियों का हम लंबे समय से सामना करते रहे हैं, आज अमरीका, ब्रिटेन आदि बड़े देशों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। अभी हाल ही में,  ब्रिटेन में अंडरग्राउंड ट्रेन में बड़ा हादसा हुआ था।

जो लोग ऐसा काम करते हैं, वे इंसान कहलाने के लायक तो नहीं हैं, मैं नहीं समझ पाता कि ऐसा कौन से दर्शन है जो इन नीच लोगों को ऐसे काम करने के लिए प्रेरित करता है।

समय की मांग है कि दुनिया की सभी ताकतें मिलकर आतंकवाद के इस राक्षस का जड़ से सफाया करने के लिए सम्मिलित प्रयास करें और हमारी यह दुनिया- हर देश, प्रदेश, धर्म और जाति के लोगों के खुशहाली के साथ आगे बढ़ने के लिए जानी जाए।

आतंकवाद का यह दुश्मन छिपा हुआ है, इसलिए और अधिक जागरूकता के साथ दुनिया के सभी प्रगतिशील देशों को, इस बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए भरसक प्रयास करना होगा।

हमारी शुभकामना है आतंकवाद की समाप्ति में हम सफल हों और जल्द ही ऐसा दिन आए कि हम इस बुराई से पूरी तरह मुक्त हो जाएं।

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।