211. स्कॉटलैंड यात्रा!

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लीजिए जैसा मैंने पहले कहा था, अपनी लंदन से स्कॉटलैंड यात्रा के अनुभव शेयर कर लेता हूँ, रिकॉर्ड भी हो जाएगा बाद में याद रखने के लिए, क्योंकि मैं बहुत जल्दी सब भूल जाता हूँ!
तीन दिन की यह यात्रा, जैसा कि टूर ऑपरेटर का शेड्यूल है, सप्ताह में वह दो बार संचालित करता है। वैसे मुझे इस तरह की शेड्यूल्ड यात्राओं में, जहाँ थोड़े समय में काफी कुछ कवर करने का प्रयास होता है, उसमें बड़ी दिक्कत ये लगती है कि बड़ी जल्दी उठकर निकलना होता है।

हाँ तो शुक्रवार को हमारी यात्रा प्रारंभ हुई, मैं और मेरी पत्नी इस यात्रा पर रवाना हुए, लंदन में ‘ईस्ट हैम’ से जहाँ बड़ी संख्या में एशियन लोग, मुख्यतः हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी रहते हैं, और अच्छी बात ये है कि ये पूछने पर पता चलता है कि सामने वाला हिंदुस्तानी है या पाकिस्तानी! उनके बीच यहाँ तो कोई हिंदुस्तान-पाकिस्तान नहीं है!

खैर जो सज्जन टूर ऑपरेटर  हैं, वो खुद ही हमारी बस चला रहे थे, जो कि लग्ज़री मिनी बस थी, यात्रियों की संख्या के आधार पर बड़ी बसें भी चलाई जाती हैं, उनकी बहुत सी बसें हैं, मूलतः गुजरात से हैं  और अपनी संपत्ति के बारे में बता रहे थे लगा कि ये छोटे-मोटे मुकेश अंबानी हैं। इनकी बसों में सामान्यतः हिंदुस्तानी यात्री यात्रा करते हैं और रास्ते में वे खुद अथवा उनका संबधित चालक गाइड का काम भी करते हैं। ‘ईस्ट हैम’ के अलावा भारतीय आबादी वाले दो और स्टॉप और ऐसे हैं जहाँ से यात्री बैठते हैं और अलग-अलग पैकेज हैं, हमारा पैकेज तीन दिन और दो रात का था, जिसमें होटल में ठहरना, ब्रेकफास्ट और डिनर आदि शामिल थे, 250 पाउंड प्रति व्यक्ति की दर से!

ईस्ट हैम से सुबह 4-45 बजे रवाना होने के लिए हम अपने घर से सुबह 4-15 बजे चले और समय पर टीम में शामिल हो गए।

बस में सवारियां इकट्ठा करने के बाद, रास्ते में चाय-भोजन आदि के ब्रेक लेते हुए, पहला मुकाम जो था वो था बालाजी मंदिर। वैसे मेरा मानना है कि मैं सही मायनों में आस्तिक हूँ, ऐसा जिसकी आस्था किसी मंदिर अथवा मूर्ति की मोहताज नहीं है। बर्मिंघम में मंदिर पर पहला पड़ाव पड़ा, काफी सुंदर मंदिर बना है वहाँ दर्शन भी किए और फिर आगे बढ़ गए। अगला पड़ाव क्या, वैसे तो कई बार रास्ता ही मंज़िल बन जाता है, क्योंकि रास्ते की दृश्यावली बहुत सुंदर थी, लोगों के मोबाइल और कैमरे कम पड़ रहे थे उन दृश्यों को क़ैद करने के लिए, अब कितने दिन तक वे छवियां सुरक्षित रहेंगी, ये अलग बात है।

अगला पड़ाव, जो इसी सुंदर दृश्यावली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, वो थी ‘लेक ड्रिस्ट्रिक्ट’, उसी में हमने ‘विंडरमेयर लेक’ जो कि इंग्लैंड में ताजा पानी की सबसे बड़ी झील है, उसमें नौका विहार किया था। इस प्रकार के दृश्य हमने पहले ‘केरल’ में देखे थे, जिसे ‘भगवान का अपना घर’ (गॉड्स ऑव्न कंट्री) कहते हैं, वैसे सच्चाई तो यह है कि पूरी दुनिया में ही सुंदरता बिखरी पड़ी है और पूरी दुनिया ही उसका अपना घर है, जिसके बारे में कहा गया कि-

‘ये कौन चित्रकार है!’

एक बात और वहाँ देखी, झील के पास बतख और हंस आदि लोगों के एकदम पास चले आते थे, कोई डर नहीं लगता उनको, लोगों के हाथ से खाना खा रहे थे। ऐसा ही अनुभव कई वर्ष पहले अंडमान में हुआ था, जहाँ बारहसिंघे आकर हमारे हाथ से बिस्कुट आदि खा रहे थे।
स्कॉटलैंड में प्रवेश करने पर, बताया गया कि पहला घर एक ‘लोहार का घर’ था, जो घोड़े की नाल बनाता था, कुछ कहानियां जुड़ी हैं उससे, शायद शादियां ज्याद मजबूत बनाने में उसकी कोई भूमिका थी, लोग घर से भागकर, स्कॉटलैंड में आकर शादी करते थे।

अंत में हम उस स्थान पर पहुंचे जहाँ पर भारतीय डिनर की व्यवस्था थी, परदेस में ऐसी व्यवस्था मिल जाए तो बहुत सुकून मिलता है। विशेष रूप से हमारे जैसे शाकाहारियों के लिए।

भोजन करके हम अपने होटल में चले गए विश्राम करने और अगले दिन समय पर निकलने के लिए तैयार रहने के लिए।

चित्र मौका मिलेगा तो किसी और पोस्ट में डालूंगा।

आज के लिए इतना ही, नमस्कार।