Posts for July 2018

237. ब्लॉग पर चर्चा!

अपनी ब्लॉग पोस्ट में, आज ब्लॉग लेखन के बारे में ही चर्चा करना चाहूंगा। जैसा कि ब्लॉग पोस्ट पर दिए गए नंबर से पता चलता है, ये मेरी 237 वीं पोस्ट है। बीच-बीच में मैं पुरानी पोस्ट दोहराता भी रहता […]

103. किसी का प्यार क्या तू, बेरुखी को तरसे!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज धर्मेंद्र जी के बारे में बात करने का मन हो रहा है। वैसे कोई किसी का नाम ‘धर्मेंद्र’ बताए तो दूसरा पूछता इसके आगे क्या है, शर्मा, गुप्ता, वर्मा, […]

236. चार किताबें पढ़कर ये भी, हम जैसे हो जाएंगे!

निदा फाज़ली साहब की एक गज़ल है- तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे। यह गज़ल पहले भी शायद मैंने शेयर की है, आज इस गज़ल का एक शेर खास तौर […]

102. फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एक गज़ल है उबेदुल्लाह अलीम जी की, गुलाम अली जी ने डूबकर गाई है जो बहुत बार सुनी है, बहुत अच्छी लगती है। कुल मिलाकर धार्मिक अंदाज़ में, इसको भी […]

235. जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहाँ हैं!

आज हम वर्ष 2018 में जी रहे हैं, सुना है हिंदुस्तान दुनिया की बड़ी ताक़त बन गया, आर्थिक शक्तिसंपन्न देशों में भारत की गिनती होने लगी है। कितने पैमाने होते हैं किसी देश की तरक्की को मापने, उन सबका उदाहरण […]

234. हुई शाम उनका ख़याल आ गया!

हमारी प्राचीन परंपराओं में ऐसा माना जाता रहा है कि सुबह, शाम, रात हर समय का, हर घड़ी का अपना महत्व है, हम हर क्षण का, हर घड़ी का आनंद लेने में, हर अवसर को सेलीब्रेट करने में विश्वास रखते […]

101. आईना हमें देख के हैरान सा क्यों है!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट – एक हिंदी फिल्म आई थी गमन, जिसमें ‘शहरयार’ की एक गज़ल का बहुत खूबसूरत इस्तेमाल किया गया था। वैसे यह गज़ल, आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी की घुटन, कुंठाओं […]

233. ये कहानी फिर सही!

ज़िंदगी में अक्सर होता है कि जहाँ प्रेम होता है हम छोटी-छोटी बातों पर शिकायत करते हैं, तब तक, जब तक हमको लगता है कि हमारी शिकायत को कोई असर होगा, उसका कोई अच्छा नतीजा निकलेगा! लेकिन ऐसी स्थिति भी […]

99. जार्जेट के पल्ले सी, दोपहर नवंबर की!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- बहुत बार लोग कविता लिखते हैं मौसम पर, कुछ कविताएं बहुत अच्छी भी लिखी जाती हैं। तुलसीदास जी ने, जब रामचंद्र जी, माता सीता की खोज में लगे थे, उस […]

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