229. – जी आप शाहरुख खान बोल रहे हैं?

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ये बेचारे शाहरुख का नाम मैंने ऐसे ही ले दिया, वैसे जब अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा जी ने शाहरुख का एक डायलॉग बोलकर उनका ज़िक्र किया था, तब उनको भी बहुत अच्छा लगा होगा ना!

वैसे यह सच्चाई है कि इंसान को अपना नाम, पहला अथवा मुख्य नाम सुनना बहुत अच्छा लगता है। बचपन में अथवा स्कूल, कालेज में सहपाठी आपको प्रथम नाम से बुलाते हैं, जैसे- सुरेश, और वो नालायक ‘जी’ भी नहीं लगाते और दफ्तर में ज्यादातर लोग आपके उपनाम से बुलाते जैसे ‘शर्मा जी’। नौकरी करते-करते अक्सर लोग अपने आपको पूर्वनाम से पहचानना ही भूल जाते हैं। शायद इसी का लाभ मार्केटिंग वाले आजकल भरपूर उठाते हैं।

अचानक फोन आता है, ‘आप शाहरुख खान जी बोल रहे हैं?’ ये नाम ऐसे ही ले दिया, वैसे भी अधिकतर इंसान अपने आपको महत्व के मामले में शाहरुख खान से कम नहीं समझते। अब महत्वपूर्ण होने के लिए कोई नेता या अभिनेता होना जरूरी तो नहीं है!

हाँ तो आपको अचानक फोन आता है और उधर से कोई पुरुष अथवा महिला स्वर आपको, आपके पूरे नाम से पुकारता है और आप अचरज में पड़ जाते हैं कि ये कौन हमारे स्कूल या कालेज का दोस्त आ गया, अगर महिला स्वर हो तो दिमाग पर कुछ और ज्यादा जोर डालना पड़ता है। आप इस अचरज से उभरकर जब जवाब देते हैं तब मालूम होता है कि ये आपके अनजान शुभचिंतक हैं, जो आपके अच्छे रिकॉर्ड के आधार पर आपको किसी बैंक का क्रेडिट कार्ड मुफ्त दिला रहे हैं अथवा आपके परिवार के भविष्य की चिंता करके आपका बीमा करा रहे हैं।( वैसे यह भी सच है कि इनको आपके रिकॉर्ड के बारे में कुछ पता नहीं होता!)

शुरू-शुरू में तो ये अच्छा लगता है, जब इन महान आत्माओं को आपका नाम, डाटाबेस से नया-नया मिला होता है, लेकिन बाद में सोचिए क्या करें जब हर दिन आपके 8-10 शुभचिंतक आपको बार-बार फोन करें। अगर आप मना कर दें तब भी वो कहते हैं क्यों नहीं चाहिए! ये आपके लिए बहुत लाभदायक और सही है!

अब तो ऐसा हो गया है कि जब कोई अनाम शुभचिंतक पूरे नाम से पुकारता है तो जवाब में मुंह से यही निकलता है, ‘हां जी मैं ही हूँ, बताइए क्या तक़लीफ है!’

फिर ये खयाल आता है कि आपका डाटाबेस, जो इन लोगों को रोज़गार देने वाले व्यक्ति अथवा संस्था ने कहीं से खरीदा होगा, उसके आधार पर ये बेचारे किसी उत्पाद अथवा सेवा का प्रचार कर रहे हैं। बेरोजगारी से जूझने के लिए इन बेचारों को यही रास्ता मिला है। इतना तो है कि डाटा के आधार पर ये लोगों के खातों से पैसा नहीं निकाल रहे, मेहनत करके पैसा कमाने का प्रयास कर रहे हैं! काश इनको जल्दी ही कोई सम्मानजनक रोज़गार मिल जाए, जिसमें दूसरा इंसान इनकी बात को पूरे ध्यान से सुने।

आज आपके लिए यही प्रोडक्ट प्रस्तुत कर रहा हूँ, आपका अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड देखते हुए, जरूर आजमाइए।

पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो,

मुझे इससे अपनी खबर मिल रही है।

नमस्कार।