Posts for July 2018

98. आंखों में नमी, हंसी लबों पर!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट, संपादित रूप में- बहुत सी बार ऐसा होता है कि कोई कविता शुरू करते हैं, कुछ लाइन लिखकर रुक जाते हैं। फिर आगे नहीं बढ़ पाते, लेकिन वो लाइनें भी […]

231. – बंगलौर- एक रुका हुआ शहर?

महान कवि, गीतकार पद्म भूषण गोपाल दास ‘नीरज’ जी नहीं रहे। हिंदी कविता, गीतों, गज़लों और फिल्मी गीतों के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनको विनम्र श्रद्धांजलि के साथ प्रस्तुत है आज की ब्लॉग पोस्ट। पिछले सप्ताह […]

230. – ज़िंदगी का कनॉट प्लेस?

ये ब्लॉग पोस्ट मैं #IndiSpire पर सुझाए गए विषय #MeTime को ध्यान में रखते हुए लिख रहा हूँ। मैं ऐसा मानता हूँ कि इस का आशय ऐसा समय बिताने से है, जब आप जो करते हैं, अपने और सिर्फ अपने […]

97. विकास प्राधिकरण!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज लखनऊ का एक सरकारी विभाग याद आ गया, जिससे काफी वर्षों पहले वास्ता पड़ा था, 2002 के आसपास, और इस विभाग की याद ऐसी तेजी से आई कि मैं […]

229. – जी आप शाहरुख खान बोल रहे हैं?

ये बेचारे शाहरुख का नाम मैंने ऐसे ही ले दिया, वैसे जब अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा जी ने शाहरुख का एक डायलॉग बोलकर उनका ज़िक्र किया था, तब उनको भी बहुत अच्छा लगा होगा ना! वैसे यह सच्चाई है कि इंसान […]

96. उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज वसीम बरेलवी साहब की एक गज़ल याद आ रही है, बस उसके शेर एक-एक करके शेयर कर लेता हूँ। बड़ी सादगी के साथ बड़ी सुंदर बातें की हैं, वसीम […]

228. – मैं एक बादल आवारा!

बरसात के मौसम में हवाई यात्रा के दौरान आकाश में बादलों के कुछ चित्र खींचने का अवसर मिला। प्रकृति के, बादलों के चित्र तो वैसे भी अच्छे लगते हैं, लेकिन आकाश से, बादलों के ऊपर से लिए गए चित्र, वो […]

95. तव मूरति विधु उर बसहि, सोई स्यामता आभास!

आज फिर से  प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट-  आज गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग याद कर लेते हैं। आजकल नियोजक अपने कर्मचारियों का चयन करते समय तथा बाद में अनेक अवसरों पर […]

227. – वृहस्पति वाहन- टीवीएस जुपिटर!

आज मैं अपने सभी साथियों के साथ एक अलग प्रकार के अनुभव को साझा करूंगा, जो एक लंबे समय के बाद एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में जाने का अनुभव है। काफी समय तक मैं एक प्रतिष्ठित संस्थान एनटीपीसी से जुड़ा रहा, […]

226. टीवीएस जुपिटर- वृहस्पति यान!

  टीवीएस जुपिटर के एक विज्ञापन में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, घर मे टीवीएस जुपिटर आने पर गुरू अर्थात वृहस्पति के आने की बात कहते हैं क्योंकि जुपिटर का वही अर्थ है, और इस प्रकार हम इसे वृहस्पति यान […]

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