अभी हाल ही में मैंने अपने एक महीने के लंदन प्रवास के बारे में लिखा, तो फिर खयाल आया कि यूएई, और तंजानिया ने क्या गलती की थी, जो उनको ‘कवर’ न किया जाए। ये यात्रा शायद तीन वर्ष पहले की गई थी और उस समय मैं ब्लॉगिंग जैसा कर्म नहीं करता था।

ठीक है देर आयद दुरुस्त आयद, इस बहाने उस प्रवास की कुछ बातों को फिर से याद कर लेंगे। ये बात है 2 दिसंबर, 2015 की, जब मैं अपनी धर्मपत्नी के साथ पहले विदेश प्रवास पर जा रहा था। पहले दुबई-शारजाह जहाँ हमारा सबसे बड़ा बेटा-आनंद रहता है और वहाँ 15 दिन रुकने के बाद इतना ही समय तंजानिया में, जहाँ उस समय मेरा सबसे छोटा बेटा रहता था।

मेरी दिक्कत ये है कि मैं यात्राओं को भी सामान्यतः खुद से अलग करके नहीं देख पाता हूँ। हाँ तो जैसा मैंने बताया आनंद बहुत समय से दुबई में काम कर रहा था, रहता शारजाह में था, जिनको दोनों को यूएई- संयुक्त अरब अमीरात के दो आसपास के अमीरात, नगर या राज्य कह सकते हैं। दोनों इतनी ही दूरी पर हैं जितना दिल्ली और गाजियाबाद, शायद उससे भी कम!

हाँ तो यह विचार बहुत समय से था कि दुबई जाना होगा, बाद में मेरा सबसे छोटा बेटा तुषार भी तंजानिया चला गया। अब तो और भी ज़रूरी हो गया क्योंकि आनंद तो परिवार के साथ दुबई या कहें कि शारजाह में रह रहा था लेकिन तुषार का तो अभी विवाह भी नहीं हुआ था और वो पहली बार विदेश में रह रहा था।

इतना अवश्य कहना चाहूंगा कि लंदन में जहाँ भाषा की समस्या काफी थी, वे लोग भी अंग्रेजी बोलते थे और हम भी जैसा समझ पाते थे उसके हिसाब से अंग्रेजी में जवाब देते थे, लेकिन कभी-कभी बात पूरी तरह बात नहीं पहुंच पाती थी। लेकिन एक महीने के दुबई-शारजाह-तंजानिया प्रवास के दौरान ज्यादातर ऐसा ही लगा कि हम हिंदुस्तान में ही हैं!

दुबई एयरपोर्ट पर शेख वाली वेशभूषा में बैठे आव्रजन अधिकारियों ने जब आंखों का एक्स-रे आदि करने के बाद प्रवेश की अनुमति दी, उसके बाद हम बाहर निकले और आनंद हमें दुबई एयरपोर्ट से अपने आवास ले गए जो शारजाह नगर अथवा अमीरात में था। एक प्रकार से सात अमीरात अथवा छोटे-छोटे स्टेट हैं संयुक्त अरब अमीरात अथवा यूएई में, जिनमें राजा की तरह ‘अमीर’ होते हैं, जो वहाँ के प्रधान हैं।

शारजाह में आनंद का मुहल्ला क्या था याद नहीं, हाँ सातवीं मंज़िल पर उनका फ्लैट था और फ्लैट में बेडरूम की खिड़की से पीछे ‘शारजाह को-ऑपरेटिव सोसायटी’ की बिल्डिंग दिखाई देती थी, जो चारों तरफ बनी बहुमंज़िला इमारतों के बीच अकेली एक मंज़िला इमारत थी, वर्गाकार जो काफी बड़े स्थान में फैली थी, अब इस समय उसके ऊपर और मंज़िल बन गई हों, यह भी संभव है।

घर से लगभग एक किलोमीटर दूर ही समुद्र के किनारे पर आकर्षक पार्क और टूरिस्ट स्पॉट विकसित किया गया था, वहाँ ‘कॉर्निश’ के नाम से जानते थे उसे, जहाँ सभी कुछ था, बच्चों के लिए गेम्स, खाने-पीने के लिए शानदार रेस्त्रां, समुद्र का आकर्षक नज़ारा, बैठकर आनंद लेने के लिए बेंच, और शाम के समय चलने वाला फाउंटेन, जिसमें बहुत आकर्षक शो होता था, फाउंटेन में आकर्षक छवियां भी दिखाई जाती थीं, जिनमें यूएई के अमीरों को भी दिखाया जाता था। वास्तव में बहुत आकर्षक शो था। उस समय उस पार्क को और विकसित किया जा रहा था मुझे लगता है अब तक काफी बदल चुका होगा। शाम के समय वहाँ टहलना बहुत अच्छा लगता था।

शारजाह, दुबई और संयुक्त अरब अमीरात के अन्य प्रमुख स्थान, जहाँ तक मैं जा सका उनके बारे में बाद में विस्तार से बातें करेंगे।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।