239. दुबई-शारजाह!

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शारजाह-दुबई यात्रा का विवरण, जितना कुछ अब तक याद है वो देने का प्रयास कर रहा हूँ। मैं यह नहीं चाहता कि मेरा दिया हुआ विवरण पर्यटन विभाग द्वारा बनाई गई प्रचार पुस्तिका जैसा बनकर रह जाए, इस यात्रा में हमारी जीवंत उपस्थिति तो जरूरी है।

हाँ तो हमारी घड़ी डेढ़ घंटा पीछे हो गई दुबई पहुंचकर, जहाँ तक याद है दिल्ली से 4 बजे चले और चार घंटे की यात्रा करने के बाद वहाँ साढ़े छः बजे (वहाँ के समय के अनुसार) पहुंच गए। इस प्रकार विदेश यात्रा कुछ हद तक समय- यात्रा, अथवा कहें ‘जरनी इन टाइम’ भी कही जा सकती है।

अरब देशों में तेल का भरपूर पैसा है और उसके बल पर उन्होंने अपने नगरों को सुंदर भी बहुत बनाया है। पूरा रेगिस्तान लेकिन उसे ऐसा विकसित किया है, इतनी सुंदर सड़कें, जहाँ भी जरूरत हुई वहाँ फ्लाई ओवर अथवा अंडर-पास बना दिए, जिससे ट्रैफिक का अनावश्यक जमाव न हो। आयकर वहाँ नहीं है लेकिन कानून इतने सख्त हैं कि अगर आपकी गाड़ी निर्धारित सीमा से अधिक स्पीड से चल रही है तो कैमरे उसे दर्ज कर लेंगे और आपके ‘मेल’ अथवा मैसेज बॉक्स में फाइन का संदेश आ जाएगा और आपको उसे समय पर निपटाना होगा। इसी तरह का संदेश आपकी बॉल्कनी में कपड़े सूखते पाए जाने पर भी होगा।

अरे भाई, आप वहाँ बसने थोड़े ही जा रहे हैं, ये मैं आपको क्यों बता रहा हूँ! हाँ वहाँ पैदल यात्रियों को बहुत महत्व दिया जाता है, आप क्रॉसिंग के स्थान पर बटन दबा दें, आपके लिए ग्रीन लाइट होने पर कोई वाहन आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर सकता, वरना उसका ऑटोमेटिक चालान हो जाएगा। एक्सीडेंट होने की स्थिति में जिससे टक्कर हुई है, वो आपको संतुष्ट करने की कोशिश करेगा, क्योंकि अगर वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो बहुत ज्याद चपत लग जाएगी उसको!

हाँ तो वहाँ रेत पर बहुत सुंदरता से सड़कें बिछाई गई हैं, हरियाली का निर्माण किया गया है, पूरे के पूरे पेड़ लाकर लगा दिए गए हैं। हर तरफ सुंदरता बिखरी पड़ी है। शारजाह की कॉर्निश के बारे में तो कल बताया था। बस व्यवस्था भी वहाँ बहुत अच्छी है, अपनी पहली स्थानीय यात्रा पर हम बस द्वारा दुबई गए और वहाँ से मैट्रो ट्रेन पकड़कर दुबई में कुछ स्थान देखने गए।

दुबई में हमारी पहली मंज़िल थी दुबई मॉल, जिसके पास ही ‘बुर्ज खलीफा’ है, जिसे दुनिया की सबसे ऊंची इमारत माना जाता है। इससे पहले जो इमारत सबसे ऊंची थी वह एक होटल का भवन है- ‘बुर्ज अल अरब’! दुबई मॉल बहुत शानदार है और क्षेत्रफल के हिसाब से यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मॉल है। ऐसा लगता है कि जो कुछ कोई व्यक्ति बाहर निकलकर पाना चाहता है, वह सब कुछ ‘दुबई मॉल’ में मिल जाएगा। इस लंबे-चौड़े मॉल में पूरी तरह घूमकर एक बार में शॉपिंग पूरा करना महिलाओं के लिए चुनौती हो सकता है।

इस मॉल के अंदर ही पारदर्शी कांच की दीवार के अंदर विशाल एक्वेरियम है, जो ग्राउंड फ्लोर से ऊपर तक बना है, इसमें अनेक प्रकार की छोटी-बड़ी मछलियां और जल के अन्य जीव हैं और आप उन्हें मॉल के ऊपर के फ्लोर्स से अपने एकदम सामने देख सकते हैं, यह अपने आप में एक देखने लायक स्थान है।

मॉल के पीछे की तरफ निकलते हैं, तब सामने ही ‘बुर्ज खलीफा’ दिखाई देता है और वहाँ शाम के समय फाउंटेन चलाया जाता है और यूएई का राष्ट्रगान भी बजता है। जहाँ शारजाह के फाउंटेन की विशेषता उसका अधिक रंग-बिरंगा होना और उसमें अनेक छवियां दिखाया जाना है, वहीं यह फाउंटेन अपनी ऊंचाई और रेंज के कारण बहुत भीड़ आकर्षित करता है।

दुबई का एक भव्य आकर्षण ‘पाम जुमैरा’, भी है, ये समझ लीजिए कि समुद्र के बीच में एक नगर बसा दिया गया है, जो ‘ताड़’ (पाम) के पत्ते के आकार का है, जिसमें बहुत सारे आकर्षक भवन हैं और एक विशाल ‘एटलांटिस’ होटल भी है।

इसके अलावा हम समुद्र तट पर घूमे और होटल बुर्ज अल अरब, को भी देखा जो दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची इमारत है।

ये यात्राएं हमने दो दिनों में की थीं और अगर हाल ही की बात होती तो मैं भी इसे कम से कम दो ब्लॉग पोस्ट्स में लिखता, लेकिन जितना याद है उसके आधार पर एक ही पोस्ट में दे रहा हूँ।

कल दुबई-शारजाह के आसपास के कुछ अन्य स्थानों और गतिविधियों पर चर्चा करेंगे।

( चित्र-1 कॉर्निश फाउंटेन, 2- बुर्ज खलीफा, 3-  एटलांटिस होटल, 4-दुबई में हॉप ऑन बस,  5- होटल बुर्ज अल अरब)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।


 

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