शारजाह-दुबई यात्रा की कुछ और यादें हैं जो अभी शेयर करनी हैं। एक तो जैसे मैंने पहले कहा, जंगल में मंगल कैसे होता है, इसका ज्वलंत उदाहरण वहाँ  रेगिस्तान में सुंदर सड़कें और इमारतें बनाकर प्रस्तुत किया गया है।

एक फर्क़ जो मैंने यहाँ के मुकाबले वहाँ पर देखा, वहाँ मस्ज़िदों के किनारों पर दो ही मीनारें मैंने देखीं जबकि हमारे यहाँ चार होती हैं। एक विशेष बात ये कि वहाँ अगर आप शुक्रवार के दिन बाहर निकलने वाले हैं, तो बेहतर है कि आप या तो जुम्मे की नमाज से कुछ पहले निकल जाएं या फिर नमाज समाप्त होने के कम से कम एक घंटा बाद निकलें अन्यथा आपको काफी समय ट्रैफिक जाम में बिताना पड़ सकता है। वहाँ वीकएंड भी शुक्र-शनिवार को होता है।

खैर, जैसा मैंने पहले बताया था, यूएई में सात अमीरात हैं, जो अधिक दूरी पर नहीं हैं और उनका क्षेत्रफल हमारे यहाँ के नगरों जैसा ही है। इनमें से छः अमीरात के प्रमुख स्थानों को हम देख पाए, बाकी एक में जाने के लिए शायद अलग वीज़ा की जरूरत पड़ती है, और हमने ये यात्राएं आनंद के साथ उसकी कार में ही कीं।


दो अमीरात तो जैसे एक दुबई में हम फ्लाइट से उतरे और शारजाह में हम रहे और इन दोनों में भ्रमण का विवरण भी मैं दे चुका हूँ। आबू धाबी, जो यूएई की राजधानी है और बहुत खूबसूरत शहर, वहाँ से हमने आगे, तंजानिया जाने के लिए और लौटते समय दिल्ली आने के किए फ्लाइट पकड़ी, तभी थोड़ा-बहुत देख पाए।

कार द्वारा यात्रा करते हुए हम फुजैरा गए और रास्ते में ही दो और अमीरात होते हुए गए, मुझे स्थानों के नाम कम याद रहते हैं, समय भी काफी हो गया है लेकिन जिस प्रकार वहाँ सड़कें, टनेल आदि को खूबसूरती के साथ मेंटेन किया गया है और हरियाली क्रिएट की गई है, वह देखने लायक है। फुजैरा में समुद्र तट को बहुत सुंदरता के साथ विकसित किया गया है। कुछ चित्र इस यात्रा के दे रहा हूँ।

इसके अलावा एक बड़ा आकर्षण जो इस यात्रा का था और वह अविस्मरणीय अनुभव है, वह है सैंड सफारी!  वहाँ बने रेत के ऊंचे-ऊंचे टीलों पर वहाँ जीप के कुशल चालक आपको बाकायदा सीट-बेल्ट बांधकर ले जाते हैं और कहाँ-कहा जीप को नहीं घुमा देते, रेत को काटते हुए! ऐसा लगता है कि अभी ऊंचाई से धड़ाम, जमीन पर आने वाले हैं। उस स्थान पर छोटी-छोटी मोटर-साइकिल भी होती हैं, जिन्हें टूरिस्ट लोग सामान्य रेतीले मैदान में चलाते हैं, लेकिन टीलों पर बेतहाशा जीप में बैठकर जाने और वापस आने का अनुभव, ऐसी रेतीली चढ़ाइयों पर जो अभी एक शक्ल में थीं और अभी कुछ और हो गई हैं, वास्तव में यह अविस्मरणीय अनुभव था। इस अनुभव को प्राप्त करने के लिए वहाँ टूरिस्टों की भारी भीड़ रहती है और सभी को यह बहुत अच्छा लगता है।

सैंड सफारी के इस अनुभव के बाद वहाँ शाम के भोजन और उससे पहले आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी व्यवस्था होती है। मुझे वहाँ लगा कि शायद कुछ कलाकार भारतीय भी रहे हों अथवा कुछ कार्यक्रम ऐसे थे जो भारत में विकसित हुए हैं, जैसे मटकी डांस, अथवा थाली पर नृत्य जैसा, अब ठीक से याद नहीं लेकिन ये प्रस्तुतियां भी रोमांचक और अत्यंत आकर्षक लगी थीं। यदि आप दुबई यात्रा पर जाते हैं तो मैं सुझाव दूंगा कि सैंड सफारी का आनंद अवश्य लें।

मुझे मालूम है कि काफी कुछ छूट गया होगा, लेकिन फिलहाल दुबई-शारजाह प्रवास के संबंध में इतना ही,

नमस्कार।