243. तंजानिया, दार-अस-सलाम भ्रमण-1

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चलिए अब तंजानिया भ्रमण की बात कर लेते हैं। जैसा मैंने बताया, ‘दार-अस-सलाम’ में भी बहुत सुंदर ‘बीच’ हैं, अच्छे मॉल हैं, जिनमें जाकर लगता है कि हम भारत के ही किसी मॉल में हैं।

कुछ समुद्र तट के सफेद रेत वाले क्षेत्र भी हैं, जो काफी आकर्षक हैं, सड़क के किनारे पर कई सुंदर रिज़ॉर्ट बने हुए हैं, जो समुद्र के किनारे पर हैं, उनमें से ही एक है ‘व्हाइट सैंड्स होटल एंड बीच रिज़ोर्ट’ जहाँ आराम की, चाय-पानी की, रुकने की सुविधाएं हैं, सुंदर गार्डन हैं और वहाँ से होकर ही नाव पकड़कर आप  दूसरे किनारे पर जाते हैं। दूसरे किनारे पर ‘व्हाइट सैंड्स’ का इलाका है जो पिकनिक के लिए आकर्षण का एक बड़ा केंद्र है।

दार-अस-सलाम के आसपास के प्रमुख स्थानों में से एक हैं ‘उडजुंग्वा’ की पहाड़ियां। इस इलाके में एक बहुत सुंदर झरना है यहाँ लोग पहाड़ पर पर भी चढ़ते हैं और यहाँ कुदरत का सुंदर नज़ारा देखने को मिलता है और जो सबसे बड़ा आकर्षण इस क्षेत्र का है,  वह है-  ‘मिकुमि नेशनल पार्क’। यह अपने आपमें ऐसा स्थान है जिसको देखने के लिए पूरा दिन कम पड़ता है। इस नेशनल पार्क के आसपास बहुत से होटल बने हुए हैं, जहाँ लोग रात में ही जाकर रुक जाते हैं, वहाँ रात में लाइट आदि भी नहीं जलाते क्योंकि पूरा इलाका जंगली जानवरों का है, सुबह होने पर लोग जल्दी ही इस नेशनल पार्क में जाकर जल्दी टिकट प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।


विशाल क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य में, अन्य स्थानों के मुकाबले जो जंगली प्राणी अधिक मात्रा में देखने को मिलते हैं, उनमें से एक तो है जिराफ, जो वहाँ काफी बड़ी संख्या में हैं, इसके अलावा जेबरा भी वहाँ पर बहुत हैं। एक स्थान पर तो जेबरा की खाल पड़ी हुई दिखी, ऐसा लगा जैसे किसी ने धारीदार कपड़ा वहाँ डाल दिया हो। हाथी भी वहाँ पर अलग तरह के हैं और हाथियों का एक झुंड हमारी जीप के पास से ही होकर गुजरा, हमारे चालक एवं गाइड ने हम लोगों को चुप करा दिया कि कहीं कोई हाथी भड़क न जाए। वैसे वहाँ अलग अलग हिस्सों में अलग किस्म के जानवर हैं, और लगभग सभी वन्य प्राणी हैं, जिनकी वहाँ उम्मीद की जा सकती है।


उडजुंग्वा क्षेत्र की तरफ बढ़ते समय हमने सड़कों जो स्थिति देखी, उसमें हिंदुस्तान में पाई जाने वाली खराब से खराब और अच्छी से अच्छी सड़क का अनुभव हमें हुआ। जाते समय शाम हो गई थी, शायद पूर्णमासी का दिन था, हमने देखा कि चांद बहुत बड़ा, थाली जैसा लग रहा था, शायद वहाँ ऐसा ही दिखता हो! रास्ते के अंतिम 10-12 किलोमीटर क्षेत्र में सड़क बन रही थी शायद, बहुत खराब हिस्सा था वो यात्रा का! उस समय हम, यही सोच रहे थे कि कब यह रास्ता खत्म होगा! लौटते समय सड़क बहुत अच्छी थी, रास्ते में हमने एक जगह खाना खाया, वो रेस्टोरेंट किसी भारतीय का था, एक महिला उसे चला रही थी, उसके कुछ जानने वाले उनके वहाँ शराब पी रहे थे और गप्प मार रहे थे, वो हम पर ध्यान ही दे रहे थे सो उनसे भारतीय अंदाज में झगड़े का आनंद भी लिया।

कुल मिलाकर अभी तक की यात्रा में ‘मिकुमि नेशनल पार्क’ सबसे बड़ी उपलब्धि थी। इस यात्रा को सकुशल संपन्न कर हम घर वापस लौटे और इसके बाद, अगले आलेख में, मैं जंजीबार यात्रा का उल्लेख करूंगा।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।