तंजानिया प्रवास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है- ज़ांज़ीबार यात्रा। ज़ांज़ीबार द्वीप समूह, तंजानिया का एक अर्द्ध स्वायत्त भाग है। वहाँ जाने के लिए अलग ‘वीज़ा’ की ज़रूरत तो नहीं पड़ती, लेकिन वहाँ आपके पासपोर्ट पर स्टैंप लगाकर आपका आना-जाना दर्ज किया जाता है। ‘फैरी’ द्वारा ‘दार-अस-सलाम’ से ज़ांज़ीबार पहुंचने में दो घंटे लगते हैं, सभी आवश्यक सुविधाओं से लैस, अच्छी फैरी-सेवा उपलब्ध है, जिसमें इकोनॉमी क्लास में 35 डालर किराया लगता है। सो अपने तंजानिया प्रवास के दौरान हमने भी ज़ांज़ीबार यात्रा को उसमें शामिल किया और फैरी द्वारा वहाँ पहुंच गए।

 

ज़ांज़ीबार में जो होटल हमारे लिए, हमारे बेटे तुषार ने बुक किया हुआ था, उसके मालिक कोई पाकिस्तानी सज्जन थे। होटल का नाम किसी मुस्लिम युवक के नाम पर रखा गया था, अभी याद नहीं आ रहा, जो होटल मालिक का संबंधी था और जिसने अपना जीवन बहुत संघर्ष में बिताया था। होटल पुरानी हवेली किस्म का था, उसमें काफी अच्छी सुविधाएं थीं और पलंग की ऊंचाई सामान्य से कुछ अधिक थी। होटल में ऊपर एक ‘बार’ भी था, मुझे इसलिए याद है कि नववर्ष की रात में हम वहीं बैठे थे, वहाँ कोई गतिविधि नहीं थी, लेकिन हम बार में बैठकर पास ही बीच पर बने चौपाटी जैसे स्थान पर और सामने एक अन्य होटल में चल रही गतिविधियों को देख रहे थे।

खैर पर्यटन की दृष्टि से ज़ांज़ीबार में बहुत से स्थान हैं, हमारे होटल से थोड़ी ही दूर बनी बीच पर, काफी बड़ा बाजार था, खाने पीने का, उसे आप वहाँ की चौपाटी भी कह सकते हैं। पास में ही कुछ पुराने महल, किले जैसे भवन भी थे लेकिन उनको हमने दूर से ही देखकर सलाम कर लिया। वहाँ की ‘बीच’ और उस पर चल रही मार्केट का हमने आनंद लिया, वहाँ से दो हैट खरीदे, जो शायद वहाँ की गर्मी और धूप के लिए आवश्यक हैं।

पहली और अत्यंत महत्वपूर्ण मंज़िल जहाँ हम वहाँ गए, वह है- प्रिज़न आइलैंड। नाव द्वारा इस द्वीप पर जाते हैं और अद्भुद नजारे वहाँ देखने को मिलते हैं। संभवतः जैसे हमारे यहा ‘काला पानी’ है, वैसे ही किसी ज़माने में वहाँ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले कैदी और गुलाम रखे जाते थे। चारों तरफ समुद्र, कोई भागने का साधन नहीं। लेकिन वहाँ पर समुद्र का, रेतीले मैदान का दृश्य बहुत सुंदर है, रंग बिरंगा पानी बहुत आकर्षक लगता है। अगर ज़ांज़ीबार जाते हैं तो वहाँ अवश्य जाना चाहिए। हमने देखा कि अंग्रेज और अन्य देशों के लोग वहाँ रेत में समाधि लिए हुए थे, गड्ढा करके, अपने ऊपर रेत चढ़ाकर!

प्रिज़न आइलैंड का एक और बड़ा आकर्षण था, वहाँ पर मौजूद कछुए, जिनकी उम्र और आकार बहुत अधिक थे, मैंने इतने बड़े कछुए कहीं और नहीं देखे हैं। हाँ उस ऐतिहासिक जेल के कमरे आदि भी देखने लायक हैं और कुछ पक्षी भी।

एक दिन प्रिजन आइलैंड को देखने के बाद, अगले दिन हमने वहाँ के कुछ अन्य प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया, दिन भर के लिए टैक्सी लेकर और एक बार और ये खयाल आया कि वहाँ पर गिनती काफी बड़ी करनी पड़ती है, क्योंकि दिन भर की टैक्सी के लिए वहाँ की मुद्रा में जो भुगतान करना था, वो साठ-सत्तर हजार था!

टैक्सी द्वारा हमने दिन भर भ्रमण किया, वहाँ की नेचुरल सीनरी देखने लायक थी, एक स्थान था- ‘डॉल्फिन आइलेंड’ जहाँ नौकायन होता है और बताया जाता है कि सुबह के समय डॉल्फिन मछलियां देखी जा सकती हैं, खैर हम समय पर नहीं निकल पाए, लेकिन जो लोग हमसे पहले आए थे उन्होंने बताया कि वे भी नहीं देख पाए हैं!

एक बड़ा आकर्षण जिसका ज़िक्र मैं करना चाहूंगा, वह है- जोजनी च्वाका बे नेशनल पार्क। यहाँ अत्यंत सुंदर वन्य वातावरण में अनेक आकर्षक जीव-जंतु देखने को मिलते हैं, जिनमें सबसे बड़ा आकर्षण हैं वानर-जाति के छोटे-छोटे जीव, जिन्हें ‘रेड कोलोबस’ कहा जाता है, आप इनके बहुत नज़दीक जा सकते हैं, बहुत फ्रेंडली और आकर्षक प्राणी हैं। इस स्थान पर पूरा दिन बिताया जा सकता है परंतु हमारा जो कार्यक्रम था उसके अनुसार हमें जल्दी लौटना पड़ा।

कुल मिलाकर यदि आप तंजानिया गए हैं तो ज़ांज़ीबार जाना और यदि ज़ांज़ीबार गए हैं तो वहाँ पर प्रिज़न आइलैंड, और जोजनी च्वाका बे नेशनल पार्क जाना बहुत अच्छा रहेगा।

आज के लिए इतना ही

नमस्कार।