248. उडुपि- धर्म और पर्यटन का केंद्र!

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आज उडुपि कि बारे में बात कर लेते हैं। बहुत दिन पहले किसी ने इस क्षेत्र के बारे में बताया था, इसलिए वहाँ जाने की योजना बनाई। सच्चाई तो यह है कि दो बार वहाँ की टिकट कराकर रद्द करनी पड़ी, अंततः वहाँ पिछले सप्ताहांत में जाने का अवसर आ ही गया।

मैं गोआ में रहता हूँ और समुद्र तट के हिसाब से देखा जाए तो गोआ से उडुपि जाने के लिए कोई तर्क देना संभव नहीं है। वैसे भी यात्रा, पर्यटन के लिए तर्क किस काम के, अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि ‘गेराल्ड गॉल्ड’ ने कहा है ना-

कम आई मे, बट गो आई मस्ट!  

बियॉन्ड दा ईस्ट, दा सनराइज़, बियॉन्ड दा वैस्ट दा ‘सी’,

एंड ईस्ट एंड वैस्ट दा वांडर थर्स्ट, दैट विल नॉट लैट मी बी।

उडुपि गोआ से अधिक दूरी पर नहीं है, एक्सप्रेस ट्रेन द्वारा चार से पांच घंटे लगते हैं, और बस द्वारा लगभग आठ घंटे! ट्रेन का किराया पांच-छः सौ रुपये और बस का 300 रुपये, लेकिन गोआ में घर से स्टेशन जाने का टैक्सी भाड़ा 1200 रुपये!

खैर, मैं गोआ की क्यों बता रहा हूँ, मुंबई से मंगलौर वाली लाइन पर होकर, आप भारत के लगभग हर भाग से उडुपि पहुंच सकते हैं। कर्नाटक राज्य में उडुपि, मंगलौर के निकट स्थित है। उडुपि में आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम है। यह कृष्ण भक्ति का प्रमुख केंद्र है। यहाँ के ऐतिहासिक मठ और मंदिर, लोगों को धार्मिक तीर्थ यात्रा के लिए और समुद्र-तट, प्राकृतिक सौंदर्य और अन्यथा पर्यटन के लिए आमंत्रित करते हैं।

वैसे देखा जाए तो गोआ से उडुपि की सड़क मार्ग से, अपने वाहन में यात्रा करने में लोग वास्तव में प्रकृति की गोद में ही, निरंतर सुंदर हरियाली पहाड़ियों समुद्र और बैक वाटर्स के बीच से सौंदर्य का निरंतर आनंद लेते हैं। यह यात्रा, बीच में कई पड़ाव लेते हुए भी की जा सकती है।

उडुपि की माल्पे बीच अपनी सुंदरता और स्वच्छता के कारण, विशेष

रूप से आकर्षित करती है। मैंने इसके किनारे पर कहीं कूड़ा नहीं देखा, जैसा कि बहुत जगह देखने को मिलता है।

अगर आप प्रकृति के सौंदर्य का भरपूर आनंद लेना चाहते हैं, तो उडुपि अवश्य जाएं, विशेष रूप से क्योंकि यहाँ अधिक भीड़भाड़ भी नहीं है और अगर आप इसके साथ ही धार्मिक स्थलों, प्राचीन मठों और मंदिरों के दर्शन भी करना चाहते हैं, तब भला आप और कहाँ जाएंगे!

एक बार आप मन बना लें, तब आप ‘गूगल’ करके इस स्थान के बारे में, अपनी चाही गई अधिक जानकारी तो प्राप्त कर ही सकते हैं।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।