अब यह भी अजीब इत्तेफाक़ है कि मैंने अभी हाल ही में, अपनी एक पोस्ट में भगवान से बात होने का ज़िक्र किया था, लेकिन वो स्वप्न में था। अब मैं फोन पर भगवान से हुई बातचीत आपके साथ शेयर कर लेता हूँ!
असल में, मैं उन लोगों में से हूँ जो फोन अपने पास रखे रहते हैं, कि कोई फोन आ जाए तो जवाब दे दें। खुद मैं फोन बहुत कम करता हूँ और जो फोन मेरे पास आते हैं, उनमें आधे से ज्यादा ऐसे शुभचिंतकों के होते हैं जो मुझे, पता नहीं मेरे कौन से पर्फार्मेंस के आधार पर कोई क्रेडिट-कार्ड, उधार आदि दिलाने के लिए बेचैन रहते हैं और उनकी ये खास बात होती है कि वे पूरे नाम से मुझे, और मुझे क्या सभी को बुलाते हैं, जो कहीं डाटाबेस से उनको मिल जाता है, क्योंकि ये माना जाता है कि लोग अपना पहला नाम, मुख्य नाम सुनकर बहुत जल्दी कनेक्ट हो जाते हैं।

खैर हुआ ये कि मैं अपने मोबाइल पर गेम खेल रहा था तभी फोन की घंटी बजी, नंबर कोई जाना-पहचाना नहीं था। ऐसे में, मैं अक्सर ये मान लेता हूँ कि ये कॉल-सेंटर का होगा और वो मुझे कोई सर्विस बेचना चाहेंगे। उधर से आवाज आई ‘श्रीकृष्ण’ बोल रहे हो! मुझे यह तो लगा कि ये किसी सेवा बेचने वाले की कॉल होगी, लेकिन ये ठीक नहीं लगा कि नाम के साथ मेरा ‘सरनेम’ नहीं बोला और नाम के बाद जी भी नहीं लगाया।

मैंने रूखेपन से कहा कि आपको मेरा डाटा कहाँ से मिला? इस पर जो जवाब आया वो मुझको झटका देने वाला था, उधर से कहा गया- ‘मेरे पास तो सबका डाटा होता है!’ मैंने फिर पूछा-‘आपने मेरा नंबर कैसे मिलाया’, इस बार मैं और चौंक गया जब उधर से आवाज आई- ‘मुझे नंबर मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती बेटा! अगर मैं किसी से बात करना चाहता हूँ तो वो हो जाती है। वैसे मुझे फोन की जरूरत भी नहीं पड़ती! ये तुम्हारे हाथ में था, तो सोचा कि इसमें से ही बोल लेता हूँ!’

मुझे लगा कि यह कैसे संभव है, मैंने फिर कहा-‘सीधी तरह बताइए न कि आप कौन हैं, जो मुझे बेटा कह रहे हैं!’ उधर से आवाज आई-‘बेटा, समझ तो तुम गए हो, लेकिन मेरे मुंह से ही सुनना चाहते हो तो सुन लो, मैं भगवान हूँ!’ एक बात और, आवाज में बुज़ुर्गियत और वात्सल्य शुरू से झलक रहे थे और मैं पहली बार ये आवाज सुनकर ही सम्मोहित हो गया था।

ईश्वर ने फिर कहा-‘मैं आशा करता हूँ कि तुमको विश्वास दिलाने के लिए मुझे कोई विशेष प्रयास नहीं करना होगा!’

मैंने कहा चलिए मैं विश्वास कर लेता हूँ, लेकिन ये तो अजीब बात है ना! मैं तो कभी आपके मंदिर भी नहीं जाता, फिर आप मुझसे क्यों बात कर रहे हो!

ईश्वर ने कहा, आज मेरा ऐसे ही मन था कि किसी सरल हृदय मनुष्य से बात करूं, यह भी जान लूं कि उसके विचार में मुझे क्या करना चाहिए! पहले तो ये ही बता कि तुमको क्या चाहिए और फिर तुम्हारी दुनिया के लिए, पृथ्वीवासियों के लिए क्या करना चाहिए!

मैंने कहा- प्रभु मैं अपने लिए क्या मांगूं! मुझे भरोसा है कि मुझे जिस चीज की ज़रूरत होगी, आपकी कृपा से मिल ही जाएगी। हाँ यही है कि कई बार आपकी कुदरत बहुत क्रूर नजर आती है। कहीं बाढ़, कहीं सूखा, कहीं भूकंप- ये सभी मासूम लोगों की जान लेकर चले जाते हैं।

दुनिया इतना आगे बढ़ रही है लेकिन आज भी बहुत से लोग भूख से मर जाते हैं। बेशक इस मामले में इंसान भी बहुत कुछ कर सकते हैं, लेकिन इन मामलों में भी आपकी कृपा, आपकी प्रेरणा काम कर सकती है ना।
बस यही निवेदन है प्रभु कि इस दुनिया को दुख से मुक्त करने के लिए जो कुछ आप कर सकते हैं, अवश्य करें।

ईश्वर ने मुझे आश्वासन दिया कि जो कुछ उनसे हो सकेगा, वह अवश्य करेंगे और फोन कट गया। हाँ कॉल रिकॉर्ड में यह कॉल कहीं दिखाई नहीं दे रही थी और हाँ, मैं सोया हुआ भी नहीं था!

नमस्कार।’
‘This post is a part of Write Over the Weekend, an initiative for Indian Bloggers by BlogAdda.’