Posts for October 2018

131. जवां रहो!

आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अब जब पुरानी कविताएं शेयर करने का सिलसिला चल निकला है तो लीजिए, मेरी एक और पुरानी कविता प्रस्तुत है- सपनों के झूले में झूलने का नाम है- बचपन, तब तक-जब […]

The Book I love the most

Today I am expressing myself inspired by weekly prompt on #Indispire and it gives me a chance to remember a few of the books I loved to read. Though it is a fact that since long, I am not doing […]

WOW: Doodle Something & Write !

In life we all have so many dreams, we sometimes make resolutions, but we always keep thinking of achieving great things. Human mind is so complex and so unstable; we have several ideas in a few seconds. Sometimes we get […]

130. बचपन

आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- मेरी कुछ पुरानी कविताओं को शेयर करने के क्रम में, प्रस्तुत है आज की कविता- बचपन बचपन के बारे में, आपके मन में भी कुछ सपनीले खयालात होंगे, है भी ठीक, […]

129. मन के सुर राग में बंधें!

आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- पुरानी कविताएं, जिनको मैंने उस समय फाइनल नहीं माना यानी ‘पास्ट इंपर्फेक्ट’ कविताओं में से, एक कविता आज प्रस्तुत है- मुझमें तुम गीत बन रहो मुझमें तुम गीत बन रहो, मन […]

जब हम दोनो ज़ुदा हुए

आज फिर से अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- जब हम दोनो ज़ुदा हुए हम […]

128. पेड़!

आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- किसी ज़माने में कविताएं लिखने का बहुत चाव था। उस समय जो कविताएं किसी हद तक ‘परफेक्ट’ लगती थीं उनको मित्रों के बीच, गोष्ठियों में पढ़ देता था। बहुत सी पांडुलिपियां […]

तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ!

आज अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाये एक गीत का पहले अंग्रेजी रूपांतर प्रस्तुत करूंगा और बाद में मूल गीत प्रस्तुत करूंगा। यह गीत शैलेंद्र जी ने लिखा था और इसका संगीत दिया था – शंकर-जयकिशन कि विख्यात जोड़ी […]

फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग पर लिखे गए कुछ छंद

आज फिर से अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग […]

126. कहती टूटी दीवट, सुन री उखड़ी देहरी!

आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज एक खबर कहीं पढ़ी कि उत्तराखंड के किसी गांव में केवल बूढ़े लोग रह गए हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जवान लोग रोज़गार के लिए शहरों को पलायन कर गए […]

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