आज एक बहुत पुराना गीत याद आ रहा है, जो 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म- शगुन से है, गीत लिखा है साहिर लुधियानवी जी ने और खैय्याम जी के संगीत निर्देशन में इस गीत को जगजीत कौर जी ने गाया है। बड़ा खूबसूरत गीत है, मैं अपनी ओर से तैयार किया गया, इसका अंग्रेजी प्रारूप पहले शेयर करना चाहूंगा और उसके बाद में यह मूल गीत-

You handover all your grief and sorrow,
all the issues disturbing you to me,

I ask you in the name of your sorrow,
give the solitude of your heart to me.

I know, I am not worth anything
as per your thoughts,

but what would be wrong if
You handover all the sorrow,
the agitation to me.

Let me see how people in this world-
make you face troubles,

for some days, let me take the responsibility
of guarding you.

Your heart, which I begged for,
But others got,

would there be any problem if you
pass on the insult faced by-
that heart of yours to me!

और अब इसके बाद यह खूबसूरत गीत, मूल रूप में-

तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो,
तुम्हें ग़म की कसम, इस दिल की वीरानी मुझे दे दो।

ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में,
बुरा क्या है अगर, ये दुःख ये हैरानी मुझे दे दो।

मैं देखूँ तो सही दुनियाँ तुम्हें कैसे सताती है,
कोई दिन के लिये अपनी निगेहबानी मुझे दे दो।

वो दिल जो मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था,
बड़ी शय है अगर उसकी पशेमानी मुझे दे दो।

आज के लिए इतना ही।

नमस्कार।
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