आज अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद-

संगीत के लिए कुछ छंद

ऐसी कोई नहीं होगी सौंदर्य-पुत्री,
जिसका जादू तुम्हारी तरह मुग्ध करता हो,
और तुम्हारा मधुर स्वर है मेरे लिए-
समुद्र के जल पर थिरकते संगीत की तरह;

कभी ऐसा लगता है कि ये ध्वनियां
मुग्ध हुए समुद्र को ठहर जाने को बाध्य कर देती हैं;
लहरें स्थिर होकर जैसे चमचमा रही हों,
और जैसे निद्रामग्न हवाएं स्वप्न देख रही हों।

और अर्द्धरात्रि का चंद्रमा, उस गहरे शून्य के ऊपर-
अपनी सुनहरी जंजीर बुन रहा है,
जिसका सीना ऐसे धीरे-धीरे ऊपर नीचे हो रहा है,
जैसे कोई बच्चा सो रहा हो:

और इसलिए वह परम आत्मा भी तुम्हारे सामने झुकती है,
पूरी परंतु कोमल भावना के साथ-
तुम्हें सुनने और दुलार करने के लिए;
जिस प्रकार गर्मियों के समुद्र में उफान आता है।

और अब मूल अंग्रेजी कविता-

Stanzas For Music

There be none of Beauty’s daughters
With a magic like thee;
And like music on the waters
Is thy sweet voice to me:

When, as if its sound were causing
The charmed ocean’s pausing,
The waves lie still and gleaming,
And the lulled winds seem dreaming;

And the midnight moon is weaving
Her bright chain o’er the deep,
Whose breast is gently heaving
As an infant’s asleep:

So the spirit bows before thee,
To listen and adore thee,
With a full but soft emotion,
Like the swell of Summer’s ocean.

                                  Lord Byron

नमस्कार।
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