Posts for December 2018

नववर्ष-2019 की शुभकामनाएं।

समय निरंतर अविरल प्रवाह में बहता रहता है, आगे बढ़ता जाता है, उसमें कोई सीमा रेखाएं नहीं हैं, हाँ ग्रह-नक्षत्रों की गति, विशेष रूप से सूर्य के चारों ओर हमारी पृथ्वी की परिक्रमा के हिसाब से कुछ कैलेंडर विकसित किए […]

Online writers, reviewers-Idiots!

The weekly prompt on #IndiSpire is quite harsh towards those who write online in anyway. If I understand it covers everybody who writes online, who blogs and especially those who write Book reviews or write about lifestyle, food, fashion etc. […]

हम हिंदुस्तानी

आज कुछ इधर-उधर की बातें।   एक बात तो पहले कल की अपनी पोस्ट के बारे में कर लूं। फ्लिपकार्ट द्वारा आयोजित कॉन्टेस्ट के लिए पोस्ट लिखी थी। मैं ऐसे कॉन्टेस्ट से कोई उम्मीद नहीं रखता, लेकिन भागीदारी करने में […]

मैं चाहता हूँ कि तुम हो जाओ अविचल

आज फिर से, मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने […]

25. अखबारों में, सेमीनारों में, जीता है आम आदमी!

पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! अब बारी थी मेरे सेवाकाल के अंतिम नियोजक, एनटीपीसी लिमिटेड के साथ जुड़ने की, जहाँ मेरी सेवा […]

कविता- पाब्लो नेरुदा

आज फिर से, लंबे अंतराल के बाद, मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में […]

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