किसी नए नगर में जब हम जाते हैं तब सामान्यतः क्या देखते हैं? अक्सर हम ऐतिहासिक इमारतें देखते हैं, जिनमें इतिहास के विभिन्न कालखंडों में कौन शासक रहे थे और उनके माध्यम से ही उस काल-विशेष की पहचान मानी जाती है। जैसे भारत में हम मुगलों द्वारा बनाए गए किले और महल, अंग्रेजों द्वारा बनाए गए विभिन्न वायसराय भवन आदि देखते हैं।

आजाद भारत में भी अनेक दर्शनीय स्थान बने हैं, जैसे बिरला जी द्वारा अनेक स्थानों पर बनाए गए मंदिर और अक्षर-धाम मंदिर आदि भी शामिल हैं।

भोपाल प्रवास के दौरान हमने इनमें से कुछ नहीं देखा। वहाँ हमने सांची के बौद्ध स्तूप देखे, जो देश के धार्मिक विकास में एक मील का पत्थर हैं, जहाँ सनातन हिंदू धर्म के अंतर्विरोधों से किसी समय विकसित बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए सम्राट अशोक द्वारा भगवान बुद्ध के संदेशों और जीवन की झांकियां प्रस्तुत की गई हैं।

आज भारत में तो बौद्ध धर्म को मानने वाले अधिक नहीं हैं, परंतु आसपास के देशों – श्रीलंका, तिब्बत, चीन आदि से बहुत श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। वैसे भी इसे विश्व धरोहरों में शामिल किया गया, और धार्मिक कारण से अलग भी यह एक दर्शनीय स्थान है।

हमारे इतिहास के संबंध में हमें जानकारी देने के लिए जहाँ पूर्व शासकों द्वारा बनाए गए किले और अन्य इमारतें लोग देखते हैं, वहीं बहुत से संग्रहालय भी होते हैं, जिनमें पुराने समय के हथियार, युद्ध पोशाकें, सिक्के आदि सामान्यतः शामिल होते हैं और यहाँ भी इतिहास की शासकों के माध्यम से ही पहचान की जाती है।

मुझे सोम ठाकुर जी के गीत की पंक्तियां याद आती हैं-

यूं दिये पर हर-एक रात भारी रही,

रोशनी के लिए जंग जारी रही।

उनके पर्चम भले ही किलों पर रहे,

पर दिलों पर हुक़ूमत हमारी रही।

भोपाल में हमने इसके बाद जिस स्थान का भ्रमण किया, वहाँ सामान्य मानव जीवन के इतिहास, मानवीय विकास के विभिन्न चरणों को दर्शाया गया। विकास के इतिहास की यह प्रस्तुति न तो राजाओं के इतिहास के रूप में की गई है और न धार्मिक विकास के रूप में!

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में प्रस्तुतियों के केंद्र में साधारण मनुष्य है और उसके जीवन, जीवन स्थितियों का विकास, देश में विभिन्न क्षेत्रों के संदर्भ में दर्शाया गया है। किस तरह के घरों में सामान्य मनुष्य विभिन्न समयों में रहता रहा, किस प्रकार घर की सज्जा होती थी, खाने-पकाने के लिए कैसे साधनों का इस्तेमाल होता रहा।

सामान्य मानव के जीवन के विकास के विभिन्न चरणों को, अलग-अलग क्षेत्रों के संदर्भ में दर्शाने वाला यह संग्रहालय अत्यंत आकर्षक है और जो लोग इस विषय में गहराई से जानना चाहते हैं उनके लिए तो अत्यंत उपयोगी है ही, सामान्य दर्शक को भी बहुत आकर्षित करता है। वैसे मेरे खयाल में ऐसे संग्रहालय शायद अन्य स्थानों पर भी बने हैं, एक तो मैंने शायद काफी पहले देखा है, शायद किसी दक्षिणी प्रदेश में।

मैं यही सुझाव दूंगा कि यदि आप भोपाल में विभिन्न स्थानों का भ्रमण करते हैं, तो इस मानव विकास संग्रहालय में भी अवश्य जाएं।

आज के लिए इतना ही।

नमस्कार।