भोपाल प्रवास बहुत लंबा नहीं था, तीसरी बार जब हम घूमने के लिए बाहर निकले तब पहले तो कुछ समय के लिए हम लेक व्यू मार्ग पर गए, एक बार फिर से भोपाल के छोटे-बड़े ताल का नज़ारा लेने के लिए।

 

हालांकि इस समय मैं गोवा में रहता हूँ, जहाँ घर से ही समुद्र और उस पर होने वाले सूर्यास्त का नज़ारा दिखाई देता है। लेकिन हर जगह का महत्व अलग है, और जब भी भोपाल जाता हूँ तब यहाँ के ताल देखने अवश्य जाता हूँ। विशेष रूप से भोपाल में उस क्षेत्र को अच्छी तरह से संरक्षित करके रखा गया है, अच्छा रख-रखाव किया गया है, वहाँ जाने पर हर बार अच्छा लगता है।

इसके बाद मुख्य मंत्री निवास के पास से होते हुए गुज़रे, जहाँ उस दिन तक शिवराज सिंह जी थे लेकिन उनका सामान लद रहा था और शीघ्र ही वहाँ कमल नाथ जी आने वाले हैं।

इसके बाद हम गए ‘भारत भवन’ में, जो भोपाल में सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। मुझे याद है कि श्री अर्जुन सिंह जी जब मुख्यमंत्री थे, तब उनके एक प्रिय नौकरशाह थे- श्री अशोक वाजपेयी, वास्तव में वाजपेयी जी प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। अर्जुन सिंह जी की साहित्य और कला में भी विशेष रुचि थी तथा उनके समय में ही श्री अशोक वाजपेयी के निर्देशन में भारत भवन को विकसित किया गया। अत्यंत आकर्षक और कलात्मक तरीके से विकसित इस विशाल भवन में कला और संस्कृति से जुड़े अनेक आयोजन होते ही रहते हैं।

भारत भवन में कला प्रदर्शनियां लगती रहती हैं, स्तरीय नाटकों का मंचन होता है तथा साहित्य और कला से संबंधित अनेक आयोजन होते रहते हैं।

मुझे संतोष है कि अपने भोपाल प्रवास के दौरान मैंने कला और संस्कृति को समर्पित इस महत्वपूर्ण स्थान को भी देखा, मुझे आशा है कि आगे आने वाली सरकारें इस केंद्र को और विकसित करेंगी और यहाँ स्तरीय प्रदर्शनियों और आयोजनों का सिलसिला जारी रहेगा।

आज के लिए इतना ही।

नमस्कार।