भोपाल प्रवास बहुत लंबा नहीं था, इसे समाप्त होना ही था। वहाँ रहते हुए पहले बुद्ध के धार्मिक संदेश को प्रसारित करने के लिए सम्राट अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ई.पू. में निर्मित बौद्ध स्तूप देखे। उसके बाद आलग-अलग स्थानों के संदर्भ में मानव-जीवन के विकास के विभिन्न चरणों की झांकी दिखाने वाले राष्ट्रीय मानव संग्रहालय को देखा और बाद में भोपाल ताल के साथ ही साथ कलाओं के प्रदर्शन और संवर्धन के लिए संचालित भारत-भवन का भ्रमण किया।

इन तीनों अलग-अलग किस्म के महत्वपूर्ण भ्रमणों के बाद अब क्या देखना बनता था? एक प्रस्ताव भोज नगर देखने का भी था लेकिन वह नहीं हो पाया।

वैसे दुनिया में लंबी-लंबी यात्राएं करके लोग कुछ स्थानों को देखने जाते हैं। क्या ही अच्छा हो कि उनके छोटे-छोटे प्रतिरूप, लंबी यात्रा किए बिना एक ही स्थान पर देखने को मिल जाएं। जैसे दुनिया के 7 अजूबे! जो लोग उन स्थानों तक जा सकते हैं वो तो ओरिजिनल ही देख लेंगे, उसका अलग ही मज़ा है, लेकिन अगर एक ही स्थान पर उन सबके प्रतिरूप देखने को मिल जाएं, तो यह भी एक उपलब्धि होगी न।

जी हाँ ऐसा प्रयास कुछ स्थानों पर किया गया है, जहाँ अनेक प्रसिद्ध इमारतों, स्मारकों आदि के प्रतिरूप एक स्थान पर प्रस्तुत किए गए हैं, और ऐसा ही एक स्थान भोपाल का पॉपुलर मॉल भी है। एक ऐसा स्थान जहाँ आप अगर फिल्म देखना चाहें तो मल्टीप्लेक्स है, बच्चों के आकर्षक गेम्स हैं, विशाल और सुंदर वाटर पार्क है, शॉपिंग की सुविधा भी है और खाने पीने की भी और सबसे बड़ी बात यह कि विश्वप्रसिद्ध इमारतों, जिनमें दुनिया के अजूबे भी शामिल हैं, उनके प्रतिरूप आप एक ही स्थान पर देख सकते हैं।

यह वास्तव में एक अच्छा अनुभव है। कुछ प्रतिरूप तो बहुत सुंदर लगते हैं, जैसे ताज महल का है, एफिल टावर की किस्म के तो दो दरवाजे बना दिए हैं। ‘स्टैचू ऑफ लिबर्टी’ भी है और लाल किला भी! दुबई के ‘बुर्ज अल अरब’ का प्रतिरूप तो खिलौने जैसा लगता है, हाँ उसका डिजाइन भर जानने को मिलता है, इसी प्रकार ‘लोटस टेंपल’ का प्रतिरूप भी ज्यादा प्रभावशाली नहीं बन पाया है। लेकिन कुल मिलाकर यह एक स्थानों पर अनेक प्रसिद्ध इमारतों के प्रतिरूप होना एक अच्छी सुविधा है क्योंकि ऐसे लोग तो बहुत कम होंगे जो इन सभी इमारतों को वास्तव में देख पाएं।

जो लोग इस पूरे क्षेत्र को घूमकर न देख पाएं वे वहाँ चलने वाली मिनी ट्रेन अथवा ई-रिक्शा में घूमकर भी इन इमारतों आदि को देख सकते हैं लेकिन उस स्थिति में आप कुछ समय ही हर स्थान को दे पाएंगे, क्योंकि यात्रा सीमित समय की होती है।

इस प्रकार हमने भोपाल प्रवास के दौरान यात्रा के अपने अंतिम पड़ाव का आनंद लिया। इसके साथ ही भोपाल प्रवास के संस्मरण संपन्न होते हैं, कल से कोई और बात करेंगे जी!

नमस्कार।