आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार विजेता तथा हमारे राष्ट्रगान के रचयिता कवि- गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित एक कविता का भावानुवाद है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘दिस डॉग’ का भावानुवाद-

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

यह श्वान

हर सुबह यह श्वान, जिसका बहुत लगाव है मुझसे,
शांत बैठा रहता है मेरे कदमों के पास,
उसका मुंह मुझे छूता रहता है
और मैं उसके साथ को महसूस करता रहता हूँ।

यह ऐहसास उसको कितनी खुशी देता है,
विशुद्ध उल्लास उसके पूरे शरीर में तैर जाता है।

सभी मूक जीवों में
यह इकलौता प्राणी है
जो संपूर्ण मनुष्य को देखता है
उसकी उन अच्छाइयों और बुराइयों से आगे निकलकर,
जो उसने देखी हों,
क्योंकि उसका प्रेम न्यौछावर कर सकता है अपना जीवन
वह उसको केवल प्रेम भर के लिए भी प्रेम करता रह सकता है,
क्योंकि यह वही है, जो रास्ता दिखाता है,
जीवन से धड़कती इस विशाल दुनिया को।

जब मैं उसके गहन अनुराग को देखता हूँ
उसके समूचे अस्तित्व का समर्पण
तब मैं यह नहीं समझ पाता
उसकी इस सहज प्रवृत्ति से
कि उसने मनुष्य में क्या खोज लिया है।

अपनी शांत, उत्सुक और दयनीय निगाहों से
वो यह बता नहीं पाता कि वह क्या समझता है
परंतु वह मुझे यह बताने में सफल हुआ है कि
पूरी सृष्टि के बीच
मनुष्य की वास्तविक स्थिति क्या है।

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

This Dog

Rabindranath Tagore

Every morning this dog, very attached to me,
Quietly keeps sitting near my seat
Till touching its head
I recognize its company.

This recognition gives it so much joy
Pure delight ripples through its entire body.

Among all dumb creatures
It is the only living being
That has seen the whole man
Beyond what is good or bad in him
It has seen
For his love it can sacrifice its life
It can love him too for the sake of love alone
For it is he who shows the way
To the vast world pulsating with life.

When I see its deep devotion
The offer of its whole being
I fail to understand
By its sheer instinct
What truth it has discovered in man.

By its silent anxious piteous looks
It cannot communicate what it understands
But it has succeeded in conveying to me
Among the whole creation
What is the true status of man.

नमस्कार।

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