मेरे प्रिय गायक मुकेश जी के गाये, प्रेम के और नायिका सौंदर्य वर्णन के सुंदर गीतों के क्रम में आज भी मैं एक प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ, संभव है कि मैंने इस गीत को पहले भी उद्धृत किया हो।


आज का गीत 1963 में रिलीज हुई फिल्म- ‘फूल बने अंगारे’ के लिए आनंद बक्शी जी ने लिखा था, जिसे मुकेश जी ने कल्याणजी- आनंदजी के संगीत निर्देशन में, बेहद खूबसूरत तरीके से गाया था।

आइए आज इस प्यारे से गीत को याद कर लेते हैं, जिसमें नायिका के सौंदर्य का बहुत सुंदर तरीके से वर्णन किया गया है –

चाँद आहे भरेगा, फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो, सब तेरा नाम लेंगे।

ऐसा चेहरा है तेरा, जैसे रोशन सवेरा
जिस जगह तू नहीं है, उस जगह है अंधेरा
कैसे फिर चैन तुझ बिन, तेरे बदनाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो, सब तेरा नाम लेंगे।

आँख नाज़ुक सी कलियाँ, बात मिश्री की डलियाँ
होठ गंगा के साहिल, जुल्फें जन्नत की गलियाँ
तेरी खातिर फरिश्ते सर पे इल्ज़ाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो, सब तेरा नाम लेंगे।

चुप न होगी हवा भी, कुछ कहेगी घटा भी
और मुमकिन है तेरा, ज़िक्र कर दे खुदा भी,
फिर तो पत्थर ही शायद ज़ब्त से काम लेंगे
हुस्न की बात चली तो, सब तेरा नाम लेंगे।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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