महान इंसान और गायक मुकेश जी के गाये, प्रेम और नायिका सौंदर्य वर्णन के सुंदर गीतों के क्रम में आज मैं एक और प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ|

आज का गीत 1970 में रिलीज हुई फिल्म- ‘मॉय लव’ के लिए आनंद बक्शी जी ने लिखा था, जिसे मुकेश जी ने दान सिंह जी के संगीत निर्देशन में, बेहद खूबसूरत तरीके से गाया था।

आइए आज इस प्यारे से गीत को याद कर लेते हैं, जिसमें नायिका के सौंदर्य को एक अनूठे तरीके से अभिव्यक्त किया गया है –

ज़िक्र होता है जब क़यामत का, तेरे जलवों की बात होती है,
तू जो चाहे तो दिन निकलता है, तू जो चाहे तो रात होती है।
ज़िक्र होता है जब …

तुझको देखा है मेरी नज़रों ने, तेरी तारीफ़ हो मगर कैसे,
कि बने ये नज़र ज़ुबाँ कैसे, कि बने ये ज़ुबाँ नज़र कैसे,
न ज़ुबाँ को दिखाई देता है, न निग़ाहों से बात होती है।
ज़िक्र होता है जब …

तू चली आए मुस्कुराती हुई, तो बिखर जाएं हर तरफ़ कलियाँ,
तू चली जाए उठ के पहलू से, सूनी हो जाएं प्यार की गलियाँ,
तेरे जलवे जहाँ पे रोशन हों, बस वहीं क़ायनात होती है।
ज़िक्र होता है जब …

तू निग़ाहों से न पिलाए तो, अश्क़ भी पीने वाले पीते हैं,
वैसे जीने को तो तेरे बिन भी, इस ज़माने में लोग जीते हैं,
ज़िन्दगी तो उसी को कहते हैं, जो गुज़र तेरे साथ होती है।
ज़िक्र होता है जब …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।