Posts for April 2019

इंसानों पे क्या गुज़री है!

सदाबहार गायक मुकेश जी के गाये गीतों के क्रम में आज प्रस्तुत कर रहा हूँ, 1967 में रिलीज़ हुई मनोज कुमार जी की फिल्म- उपकार का एक गीत। दीवानगी को लेकर मुकेश जी ने बहुत से गीत गाए हैं और […]

What do I forget very often?

I remember the title of the first part of the autobiography written by famous Hindi poet- Dr. Harivansh Rai Bachchan Ji, the late father of veteran actor- Sh. Amitabh Bachchan Ji. Dr. Bachchan wrote his autobiography in three parts and […]

नींद चुराने वाली- रवींद्रनाथ ठाकुर

आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है!

आज एक अलग किस्म का गीत याद आ रहा है। अलग तरह का इसके पुरुष गायक के कारण! जी हाँ, जब गायक लोग स्टेज प्रोग्राम में गाते हैं, तो अक्सर यह चेक करते हैं कि साउंड सिस्टम में पर्याप्त  ‘ईको’ […]

चूल्हे आग न घड़े दे विच पानी!

दो-तीन दिन के लिए गोवा छोड़कर, बेटे के पास बंगलौर में हूँ, जिसने नई नौकरी जॉइन की है और इसलिए वह कुछ समय के लिए फोर्स्ड बेचलर भी है। टाउनशिप कहें या नेबरहुड कहें, कैसे-कैसे बसने लगे हैं, शहर के […]

क्या मेरे हक़ में फ़ैसला देगा!

हम अपने जीवन में बहुत सी अच्छी कविताएं और गज़लें सुनते हैं, उनका आनंद लेते हैं। कुछ गीत पंक्तियां, कुछ शेर ऐसे हो जाते हैं जिनको अक्सर ‘उद्धृत’ किया जाता है, लोग अपनी बात पर बल देने के लिए उनको […]

अपनी सुना आवारगी!

आज गुलाम अली जी की गायी एक ऐसी गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसको सुनकर विशेष रूप से मेरी गुलाम अली जी की गायकी में विशेष रुचि पैदा हुई थे, यह वर्ष 1980 के आसपास की बात है शायद। इससे […]

53. पहाड़ों के क़दों की खाइयां हैं!

आज फिर से, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग| आज दुष्यंत कुमार जी का एक शेर याद आ रहा है- पहाडों के क़दों की खाइयां हैं बुलंदी पर बहुत नीचाइयां हैं। यह शेर दुष्यंत जी की एक गज़ल से […]

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