पिछले तीन दिनों से मैं राजकपूर जी की प्रसिद्ध फिल्म- ‘संगम’ के कुछ गीत शेयर कर रहा हूँ। सचमुच वह एक अलग ही समय था जब किसी-किसी फिल्म का हर गीत मास्टरपीस होता था और हर गीत सुपरहिट होता था।


जैसा कि मैंने पहले भी लिखा है- प्रेम-त्रिकोण आधारित फिल्म- संगम की कहानी को आगे बढ़ाने में गीतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस प्रेम त्रिकोण का एक कोण नायक- सुंदर (राज कपूर)- हमेशा बेझिझक, बिंदास, जो उसके मन में आया कह देने वाला, वह राधा (वैजयंती माला) से प्रेम करता है तो मान लेता है कि वह भी करती ही होगी, या करने लगेगी। उधर शांत प्रकृति वाला- गोपाल (राजेंद्र कुमार)। और इन दोनों के बीच, इनकी दोस्त राधा बेचारी कितना सहन करती है।

मैंने शांत प्रकृति वाले गोपाल की प्रेम- भावनाओं को प्रकट करने वाला गीत, जो एक प्रेम पत्र के रूप में है शेयर किया और गोपाल की बिंदास और लाउड प्रेम-भावनाओं को खुलेआम जाहिर करने वाला एक गीत भी शेयर किया है।

आज मैं इन तीनों की प्रेम संबंधी फिलासफी को व्यक्त करने वाला एक गीत शेयर कर रहा हूँ, देखिए इस गीत में कैसे इनमें से हर किसी की अलग छवि उभरकर आती है। इस गीत में गोपाल (राज कपूर) के लिए पहला अंतरा मुकेश जी ने गाया है, राधा (वैजयंती माला) के लिए दूसरा अंतरा लता मंगेशकर जी ने और गोपाल (राजेंद्र कुमार) के लिए तीसरा अंतरा महेंद्र कपूर जी ने गाया है। एक ही गीत में इन तीनों फिल्मी कैरेक्टर्स की प्रेम त्रिकोण में स्थिति और उनका व्यक्तित्व बहुत खूबी से उभरकर आए हैं।

इस गीत को लिखा है- हसरत जयपुरी जी ने और संगीत तो शंकर जयकिशन जी का है ही।

लीजिए अब  इस मधुर गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ–

हर दिल जो प्यार करेगा, वो गाना गायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा

आप हमारे दिल को चुरा के आँख चुराये जाते हैं
ये इक तरफ़ा रस्म-ए-वफ़ा हम फिर भी निभाये जाते हैं
चाहत का दस्तूर है लेकिन
आपको ही मालूम नहीं,
जिस महफ़िल में शमा हो, परवाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा, दीवाना।

भूली बिसरी यादें मेरे हँसते गाते बचपन की
रात बिरात चली आती हैं, नींद चुराने अंखियन की
अब कह दूँगी, करते करते, कितने सावन बीत गये
जाने कब इन आँखों का शरमाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा।

अपनी-अपनी सब ने कह ली, लेकिन हम चुपचाप रहे
दर्द पराया जिसको प्यारा, वो क्या अपनी बात कहे
ख़ामोशी का ये अफ़साना रह जायेगा बाद मेरे
अपना के हर किसी को, बेगाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।