Posts for June 2019

Teachers and Talent!

So it is time to present my views on the weekly prompt on #IndiSpire- Can teachers today be called “the untalented leftovers”? Give reasons. #Teachers     Yes, I do agree that when a young person chooses his career, mostly […]

चुरा ले न तुमको ये मौसम सुहाना!

जीवन में सभी चाहते हैं कि कोई हमारा खयाल रखने वाला हो, कोई हो जो हमारी सलामती की चिंता करे, हमारी फिक्र करे! लेकिन फिल्मों में और शायद ऐसा असली ज़िंदगी में भी होता है कुछ लोगों के साथ कि […]

सुंदर सपना टूट गया!

सामान्यतः हर बड़ी घटना के साथ बहुत सारे लोगों के सपने जुड़े होते हैं। हाल ही में हुए लोकसभा के चुनाव भी ऐसी ही बड़ी घटना थे। इस अवसर पर जहाँ राजनैतिक दलों को तलाश होती है ऐसे उम्मीदवारों की […]

अजब तमाशा – रवींद्रनाथ ठाकुर

आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

जय श्रीराम बोलने वाले राक्षस!

आज एक ऐसा विषय जिस पर चर्चा करना मुझे बहुत जरूरी लग रहा है। हिंदू धर्म के और हमारे राष्ट्र के महान नायक, आदर्श पुरुष- मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी को आजकल कुछ ऐसे लोग बदनाम करने में लगे हैं, जो […]

मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझसे!

आज फिर से एक ऐसा विषय जिस पर युग-युगों से चर्चा होती रही है, कार्रवाई होती रही है। फिल्म- ‘मिलन’ का एक युगल गीत है- ‘हम तुम, युग-युग से ये गीत मिलन के गाते रहे हैं, गाते रहेंगे’। जी हाँ […]

Living with Happiness!

Today I am making my submission based on the #IndiSpire prompt, which says- Is happiness worthless today? Today so many people are running to earn money leaving some responsibilities behind , while running they forget to laugh or real happiness. […]

दिन प्रतिदिन वह आता है – रवींद्रनाथ ठाकुर

आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है!

आज मैं विख्यात हिंदी कवि स्व. रामधारी सिंह दिनकर जी, जिन्हें राष्ट्रकवि माना जाता था, उनकी एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ जिसकी कुछ पंक्तियां अक्सर उद्धृत की जाती हैं और जयप्रकाश जी के आंदोलन के दौरान भी यह […]

तेरा भी सामना हो कभी, ग़म की शाम से!

आज फिर एक पुराना गीत याद आ रहा है। जैसे कि दुनिया में होता ही है और फिल्में भी तो हमारी-आपकी दुनिया का आइना ही हैं! प्रेम जीवन का और इसीलिए साहित्य का, कथा-कहानियों का भी मुख्य तत्व होता है […]

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