राजकपूर जी की प्रसिद्ध फिल्म- ‘संगम’ के कुछ गीत शेयर करने के क्रम में आज यह अंतिम प्रस्तुति है। मैंने 2-3 गीत छोड़ दिए हैं और आज अंतिम गीत इस फिल्म से शेयर कर रहा हूँ।

 

 

जैसा कि मैंने पहले भी लिखा है- प्रेम-त्रिकोण आधारित फिल्म- संगम की कहानी में गीतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। जैसा मैंने पहले लिखा गोपाल (राजेंद्र कुमार) चुपचाप कुर्बानी देता है और – सुंदर (राज कपूर) के साथ राधा (वैजयंती माला) का विवाह हो जाता है। लेकिन बाद में गोपाल (राजेंद्र कुमार) का लिखा वह प्रेम पत्र सामने आ जाता है, जो तब लिखा गया था, जब यह खबर मिली कि वायुसेना में भर्ती हुए सुंदर की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई है।

सुंदर और राधा के वैवाहिक संबंधों में संदेह के कारण पैदा हुई इस खाई को आज के इस गीत में राज कपूर साहब ने बहुत सुंदर तरीके से फिल्माया है, जैसे पर्दे पर कविता हो रही हो। ऐसे ही राज साहब को ग्रेट शोमैन नहीं कहा जाता।

लीजिए प्रस्तुत है यह बहुत प्यारा सा गीत, जिसका फिल्मांकन भी गजब का हुआ है। इस गीत को गाया है मुकेश जी और लता मंगेशकर जी ने। गीत को लिखा है- शैलेंद्र जी ने और संगीत तो शंकर जयकिशन जी का है ही।

लीजिए अब  इस मधुर गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ–

ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम
दो जिस्म मगर एक जान हैं हम,
एक दिल के दो अरमान हैं हम।
ओ मेरे सनम…

तन सौंप दिया, मन सौंप दिया
कुछ और तो मेरे पास नहीं
जो तुम से है, मेरे हमदम
भगवान से भी वो आस नहीं,
जिस दिन से हुए एक दूजे के
इस दुनिया से अनजान है हम,
एक दिल के दो अरमान हैं हम।
ओ मेरे सनम…

सुनते हैं प्यार की दुनिया में,
दो दिल मुश्किल से समाते हैं,
क्या गैर वहाँ अपनों तक के
साये भी न आने पाते हैं,
हमने आखिर क्या देख लिया
क्या बात है क्यों हैरान है हम,
एक दिल के दो अरमान हैं हम।
ओ मेरे सनम…

मेरे अपने, अपना ये मिलन
संगम है ये गंगा जमुना का,
जो सच है सामने आया है
जो बीत गया एक सपना था,
ये धरती है इन्सानों की
कुछ और नहीं इन्सान हैं हम,
एक दिल के दो अरमान हैं हम।
ओ मेरे सनम…

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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