आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘In The Dusky Path Of A Dream’ का भावानुवाद-

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

एक स्वप्न के तिमिरासन्न मार्ग पर

एक स्वप्न के तिमिरासन्न मार्ग पर मैं गया अपनी प्रेमिका का प्यार पाने- जो मेरी थी पहले के एक जन्म में।
उसका घर वहाँ था, एक सुनसान गली के अंतिम छोर पर।
शाम के समय चल रही हवा के बीच, उसका मोर अपने बसेरे में बैठा ऊंघ रहा था, और कपोत भी, किनारे पर, शांत बैठे थे।

उसने द्वार के किनारे अपना दीप नीचे रख दिया, और मेरे सामने खड़ी हो गई।
उसने अपने विशाल नेत्र मेरे चेहरे पर टिकाए, और धीमे स्वर में पूछा, ‘क्या तुम ठीक हो, मेरे मित्र ?’
मैंने उत्तर देने का प्रयास किया, लेकिन हमारी भाषा खो गई थी और भुला दी गई थी।

मैंने सोचा और सोचा, हमारे नाम मुझे याद ही नहीं आ रहे थे।
उसकी आंखों में आंसू झलकने लगे, उसने अपना दाहिना हाथ मेरी ओर बढ़ाया, मैंने उसे पकड़ा और शांत खड़ा रहा। .

हमारा दिया शाम की हवा में टिमटिमाकर बुझ चुका था।

-रवींद्रनाथ ठाकुर

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

In The Dusky Path Of A Dream

IN the dusky path of a dream I went to seek the love who was mine in a former life.

Her house stood at the end of a desolate street.
In the evening breeze her pet peacock sat drowsing on its perch, and the pigeons were silent in their corner.

She set her lamp down by the portal and stood before me.
She raised her large eyes to my face and mutely asked, ‘Are you well, my friend?’
I tried to answer, but our language had been lost and forgotten.

I thought and thought; our names would not come to my mind.
Tears shone in her eyes. She held up her right hand to me. I took it and stood silent.

Our lamp had flickered in the evening breeze and died.

 

-Rabindranath Tagore

नमस्कार।