आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Poems On Love’ का भावानुवाद-

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता 

प्रेम पर कविता

 

प्रेम खुद ही स्वयं को संवारता है;
यह अपनी आंतरिक प्रसन्नता को बाह्य सुंदरता से सिद्ध करने का प्रयास करता है।

प्रेम किसी अधिकार का दावा नहीं करता,
परंतु स्वतंत्रता देता है।

प्रेम एक अनंत रहस्य है,
क्योंकि इसकी व्याख्या करने के लिए, और कुछ है ही नहीं।

प्रेम का उपहार दिया नहीं जा सकता,
यह तो स्वीकारे जाने की प्रतीक्षा करता है।

-रवींद्रनाथ ठाकुर

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

Poem On Love

Love adorns itself;
it seeks to prove inward joy by outward beauty.

Love does not claim possession,
but gives freedom.

Love is an endless mystery,
for it has nothing else to explain it.

Love’s gift cannot be given,
it waits to be accepted.

-Rabindranath Tagore

नमस्कार।