आज एक ऐसा विषय जिस पर चर्चा करना मुझे बहुत जरूरी लग रहा है। हिंदू धर्म के और हमारे राष्ट्र के महान नायक, आदर्श पुरुष- मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी को आजकल कुछ ऐसे लोग बदनाम करने में लगे हैं, जो अपने आपको श्रीराम जी का भक्त बताना चाहते हैं, लेकिन वास्तव में वे शुद्ध रूप से गुंडे हैं।

 

 

महाबली, महा पराक्रमी और शंकर भगवान के परमभक्त – लंकापति रावण को, सारे गुणों से संपन्न होने के बावज़ूद, अपने दुष्कर्मों के कारण, साधु पुरुषों को सताने के कारण, राक्षस की श्रेणी में गिना गया और हर वर्ष हम बुराई के प्रतीक के रूप में श्रीराम जी के हाथों उसका वध होते देखते हैं और उसका पुतला जलने पर खुशी मनाते हैं।

आप यदि प्रभु के सच्चे भक्त हैं तो आप मानव मात्र से प्रेम करेंगे। श्रीराम जी का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि कहा जाता है- ‘दैहिक, दैविक, भौतिक तापा- रामराज नहीं काहुहि व्यापा’। तुलसीदास जी कहते हैं- ‘सीयराममय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरि जुग पाणि’। ‘विश्वरूप रघुवंशमणि, करहु वचन विश्वास’। जो इस दुनिया में लोगों से नफरत करता है, लोगों को कष्ट देता है, यहाँ तक कि लोगों के प्राण भी ले लेता है, वो भी भगवान के नाम पर, वह वास्तव में शुद्ध रूप से राक्षस है।

कुल मिलाकर बात है कि जो सच्चा इंसान और विशेष रूप से सच्चा हिंदू है, वह मानव मात्र से प्रेम करेगा। जो किसी भी बहाने से लोगों से नफरत करता है, वह न तो सच्चा भारतीय है, न सच्चा हिंदू है। आज ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने वाले ऐसे लोग सामने आने लगे हैं, जिनके हाथों में डंडे और अन्य हथियार होते हैं और जो व्यवहार से भक्त अथवा सच्चे हिंदू क्या, इंसान कहलाने के लायक भी नहीं हैं और शुद्ध रूप से गुंडे हैं। अभी एक घटना शायद झारखंड में सामने आई, जहाँ किसी मुस्लिम युवक को चोरी का इल्ज़ाम लगाकर पीटा गया और इस दौरान उससे कहा गया कि ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाए और पीटते-पीटते उसकी जान ले ली!

आज भारी बहुमत से जो सरकार बनी है, उसके बनने पर अगर इस प्रकार के गुंडों का हौसला बढ़ता है तो यह सरकार के लिए चिंता की बात होनी चाहिए और इस प्रकार के तत्वों को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए कि कोई दूसरा ऐसी हिम्मत न कर सके।

मुझे इस प्रकार के तत्वों के खुला घूमने पर सख्त आपत्ति है क्योंकि ये मेरी आस्था को बदनाम करते हैं, मेरे धर्म को बदनाम करते हैं और मैं सरकार से अपील करना चाहूंगा कि ऐसे लोगों को सही सबक सिखाया जाए।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।